Muslim Women Gym (कोयंबटूर):- अक्सरकहा जाता है कि जिम सिर्फ पुरुषों के लिए है। लेकिन तमिलनाडु के कोयंबटूर के सारामेडु इलाके में एक महिला ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। यहां 7वीं कक्षा तक पढ़ी शबाना नाम की महिला ने मुस्लिम महिलाओं के लिए एक खास जिम शुरू किया है, जहां रोजाना 300 से ज्यादा महिलाएं पसीना बहा रही हैं।
Muslim Women Gym: शबाना की खुद की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। 19 साल की उम्र में शादी, दो बच्चों के बाद कई सर्जरी और बढ़ता वजन। वजन कम करने के लिए जब उन्होंने इलाके में जिम ढूंढा तो एक भी नहीं मिला। फिर वह दूर एक जिम में गईं और वहीं पर महिलाओं की ट्रेनर बन गईं। वहीं से उन्होंने सोचा क्यों न अपनी बस्ती की महिलाओं के लिए ही एक जिम खोला जाए।
Muslim Women Gym: विरोध से शुरूआत, अब 300 महिलाएं
शुरुआत आसान नहीं थी। शबाना बताती हैं, जब मैंने जिम शुरू किया तो बहुत विरोध हुआ। मीडिया में खबर आई तो इतने गंदे कमेंट आए कि बता भी नहीं सकती। लोगों ने कहा एक महिला जिम नहीं चला सकती, महिलाओं को जिम की क्या जरूरत है, घर का काम करो उसी से फिट रहोगी।
पहले दिन सिर्फ 20 महिलाएं आईं। लेकिन धीरे-धीरे भरोसा बढ़ा। आज सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक 6 बैच चलते हैं, हर बैच में 50 महिलाएं। तीन बच्चों की मां राशिदा कहती हैं, “अगर लड़का जिम जाना चाहे तो तुरंत इजाजत मिल जाती है, लड़की कहे तो नहीं। समाज में गलत धारणा है कि जिम पुरुषों के लिए है। इस्लाम में भी जिम पर कोई रोक नहीं है।
राशिदा ने बताया कि उनकी तीनों डिलीवरी सिजेरियन थीं, डॉक्टर ने वजन उठाने से मना किया था। यहां ज्वाइन करने पर उनका वजन 78 किलो था, अब 13 किलो कम हो गया है।
Muslim Women Gym: बुर्के में करती हैं एएक्सरसाइज
इस जिम की सबसे खास बात यह है कि यहां ज्यादातर महिलाएं बुर्का और हिजाब पहनकर ही एक्सरसाइज करती हैं। ट्रेनर शबाना खुद बुर्का पहनकर ट्रेनिंग देती हैं। गृहिणी रहीजा कहती हैं, “यहां सिर्फ महिलाएं होती हैं, इसलिए हम अपनी सुविधा से एक्सरसाइज कर सकते हैं। यहां किसी तरह की पाबंदी नहीं है।
Muslim Women Gym: हसीना की कहानी भी दिलचस्प है। उन्होंने बताया, “शुरू में घर पर कहा कि वॉक करने जा रही हूं और जिम आ गई। सोचा पहले कुछ हासिल करूं फिर बताऊंगी। स्किपिंग में पहला इनाम जीतने के बाद घरवालों को बताया तो सब बहुत खुश हुए।
Muslim Women Gym: परिवार का मिल रहा साथ
यहां आने वाली महिलाओं को परिवार का पूरा साथ मिल रहा है। स्कूल टीचर शाहिदा ने बताया, “मुझे जिम जाने के लिए सबसे पहले मेरे पति ने ही प्रोत्साहित किया। कई दिनों तक वही सुबह 4 बजे उठाते हैं। एक दिन तो मेरी सास ने उठाया और पूछा – तुम जिम नहीं जा रही हो? सुनकर बहुत खुशी हुई।
Muslim Women Gym: आईटी में काम करने वाली शबीना कहती हैं, काम के तनाव से शरीर और मन दोनों थक जाता था। यहां आने के बाद रिलैक्स महसूस करती हूं। अब घर और ऑफिस दोनों बेहतर संभाल पा रही हूं।
शबाना पिछले 5 साल से वेटलिफ्टिंग कर रही हैं, राज्य स्तर पर कई मेडल जीते हैं और अब पुरुष वेटलिफ्टर्स को ट्रेनिंग देने की परीक्षा भी पास कर ली है। भले ही उनके पास ट्रेडमिल, बैटल रोप्स और डम्बल जैसे बेसिक उपकरण ही हैं, लेकिन उनके हौसले से 300 मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी बदल रही है।