Election Commission: SIR विवाद के बीच ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, CEC ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग; ECI ने दी सफाई

Election Commission (नई दिल्ली/कोलकाता): मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में पुराने मतदाता सूची के आधार पर दोबारा विधानसभा चुनाव कराने की मांग भी उठाई।

ममता बनर्जी की यह प्रतिक्रिया उस मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आई, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में SIR तथा मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कुछ निर्णय दोनों आयुक्तों की जानकारी के बिना लिए गए थे।

ममता बनर्जी ने क्या कहा?

ममता बनर्जी ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे पहले उनकी पार्टी और विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों की पुष्टि हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में BJP से जुड़े लोगों का इस्तेमाल किया गया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि उन्हें पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है और उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए। ये ममता बनर्जी के राजनीतिक आरोप और मांगें हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

ममता ने यह भी कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार CEC के पद पर बने रहेंगे, तब तक विपक्ष की ओर से देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। उन्होंने INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों की बैठक होने की बात भी कही।

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Election Commission: बंगाल में फिर चुनाव की मांग

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में SIR से पहले की मतदाता सूची के आधार पर नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है। उन्होंने उन अन्य राज्यों में भी दोबारा चुनाव की मांग उठाई, जहां SIR के बाद चुनाव हुए और BJP सत्ता में आई या जीत दर्ज की।

TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए जाने का आरोप लगाया है। हालांकि, ये आरोप भी राजनीतिक दावे हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

वहीं, चुनाव आयोग ने रिपोर्टों में सामने आए कथित मतभेदों को अलग संदर्भ में बताया है। ECI के अनुसार, आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है और लिखित टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी इनपुट तथा आंतरिक जांच उसकी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े फैसले समेत उसके आधिकारिक निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं। ECI ने यह भी कहा कि सदस्यों की ओर से प्रक्रिया के मसौदा चरण में उठाए गए सवालों को अंतिम निर्णय पर असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इस तरह SIR को लेकर विवाद में एक तरफ विपक्षी नेताओं द्वारा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगाए जा रहे आरोप हैं, जबकि दूसरी तरफ ECI अपने निर्णयों को कानूनी प्रक्रिया के तहत और सर्वसम्मति से लिया गया बता रहा है। मामले को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।

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