UP Vehicle Fitness Rule 2026: सोनभद्र में 7 से 9 सीटर निजी वाहनों की फिटनेस बाध्यता खत्म, 2005 का आदेश निरस्त; स्कॉर्पियो-इनोवा समेत इन गाड़ियों को राहत

UP Vehicle Fitness Rule 2026 (सोनभद्र): जिले के निजी वाहन मालिकों के लिए परिवहन विभाग ने राहत दी है। अब चालक को छोड़कर छह से अधिक और अधिकतम नौ सीट क्षमता वाले निजी गैर-परिवहन वाहनों से केवल सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं मांगा जाएगा। इस व्यवस्था से स्कॉर्पियो, इनोवा, अर्टिगा, सफारी जैसी निजी इस्तेमाल की बड़ी गाड़ियों के मालिकों को हर साल फिटनेस प्रक्रिया कराने की पुरानी बाध्यता से राहत मिलेगी।

उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने 12 दिसंबर 2005 को जारी उस पुराने आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत इस श्रेणी के निजी वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र की व्यवस्था लागू थी। परिवहन आयुक्त की ओर से जारी निर्देश के बाद नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू की गई है।

केवल सीट क्षमता के आधार पर नहीं होगी फिटनेस की मांग

नए निर्देश के अनुसार, पंजीकृत निजी गैर-परिवहन वाहनों से केवल इसलिए फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं मांगा जाएगा कि उनमें छह से अधिक और अधिकतम नौ सीटें हैं। परिवहन विभाग ने इस व्यवस्था को मोटर वाहन अधिनियम और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों से जुड़ी कानूनी स्थिति के मद्देनजर बदला है।

प्रदेश के सभी संबंधित पंजीयन अधिकारियों को पुराने आदेश के आधार पर निजी गैर-परिवहन वाहनों से फिटनेस प्रमाणपत्र की मांग नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।

UP Vehicle Fitness Rule 2026: सोनभद्र के वाहन मालिकों को फायदा

इस फैसले का असर राबर्ट्सगंज, चोपन, ओबरा, अनपरा, रेणुकूट, दुद्धी, म्योरपुर समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। परिवार के निजी इस्तेमाल में आने वाली 7 से 9 सीटर गाड़ियों के मालिकों को अब केवल सीट क्षमता के कारण नियमित फिटनेस प्रक्रिया के लिए एआरटीओ कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा।

इससे वाहन मालिकों के समय और फिटनेस प्रक्रिया से जुड़े खर्च की बचत होगी। पहले इस श्रेणी के वाहन मालिकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत फिटनेस प्रमाणपत्र बनवाना पड़ता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह बाध्यता समाप्त हो गई है।

कमर्शियल वाहनों को नहीं मिली छूट

इस बदलाव को सभी 7 से 9 सीटर वाहनों पर लागू समझना सही नहीं होगा। यह व्यवस्था निजी गैर-परिवहन वाहनों से संबंधित है। टैक्सी, परमिट या अन्य व्यावसायिक इस्तेमाल में आने वाले परिवहन वाहनों पर लागू फिटनेस नियम अपनी जगह प्रभावी रहेंगे।

यानी एक ही मॉडल की निजी और व्यावसायिक गाड़ी के लिए नियम अलग हो सकते हैं। वाहन की श्रेणी और उसके उपयोग के आधार पर संबंधित नियम लागू होंगे।

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UP Vehicle Fitness Rule 2026: सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी

फिटनेस प्रमाणपत्र की केवल सीट क्षमता आधारित बाध्यता हटने का अर्थ यह नहीं है कि वाहन की सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी समाप्त हो गई है। वाहन मालिकों को अपने वाहन की तकनीकी स्थिति ठीक रखने और सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी लागू नियमों का पालन करना होगा।

ब्रेक, टायर, लाइट, स्टीयरिंग और अन्य जरूरी हिस्सों की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है। वाहन में कोई तकनीकी खराबी होने पर उसे ठीक कराना वाहन मालिक की जिम्मेदारी रहेगी।

बोले एआरटीओ कौशल कुमार सिंह

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कौशल कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यालय से जारी आदेश के अनुसार 7 से 9 सीट वाले निजी गैर-परिवहन वाहनों के लिए केवल सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस प्रमाणपत्र की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था मुख्यालय के निर्देशों के अनुसार लागू की जा रही है।

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