US China Relations (वॉशिंगटन): चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा पर बुधवार को वॉशिंगटन पहुंचे। उनके स्वागत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पहुंचे। यहां शी चिनफिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का औपचारिक अंदाज में स्वागत किया गया। यह स्वागत इसलिए भी खास रहा क्योंकि आमतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति किसी विदेशी नेता के एयरपोर्ट पहुंचने पर खुद वहां जाकर उनका स्वागत नहीं करते।
शी चिनफिंग के विमान के पास करीब 100 फीट लंबा रेड कार्पेट बिछाया गया था। स्वागत समारोह में 21 सदस्यीय सम्मान गार्ड, अमेरिकी और चीनी झंडे, सैन्य बैंड तथा औपचारिक सलामी की व्यवस्था की गई थी। समारोह के दौरान दो B-1 बॉम्बर विमानों ने भी फ्लाईपास्ट किया।
ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप ने विमान से उतरने के बाद शी चिनफिंग और पेंग लियुआन का अभिवादन किया। इसके बाद दोनों नेताओं ने कुछ देर साथ खड़े होकर औपचारिक समारोह में हिस्सा लिया। दोनों देशों के राष्ट्रगान भी बजाए गए।
11 साल बाद वॉशिंगटन पहुंचे शी
शी चिनफिंग का यह दौरा करीब 11 साल बाद वॉशिंगटन की उनकी पहली यात्रा है। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, उनकी अमेरिका यात्रा 23 से 25 सितंबर तक है। इस दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच चीन-अमेरिका संबंधों और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत होनी है।
ट्रंप के एयरपोर्ट पर व्यक्तिगत रूप से स्वागत करने को अमेरिकी प्रोटोकॉल के लिहाज से असामान्य कदम माना जा रहा है। इससे पहले वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने भी संकेत दिया था कि ट्रंप ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर शी का स्वागत करेंगे।
US China Relations: व्यापार से लेकर AI तक कई मुद्दों पर बातचीत
शी की यात्रा के दौरान अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, टैरिफ, दुर्लभ खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे चर्चा में रहने की संभावना है। इसके अलावा ताइवान और ईरान से जुड़े विषय भी दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं।
गुरुवार को व्हाइट हाउस में दोनों नेताओं के बीच औपचारिक बातचीत का कार्यक्रम है। इसके अलावा शी के सम्मान में स्टेट डिनर भी आयोजित किया जाएगा। यात्रा के दौरान अमेरिकी प्रशासन की ओर से सैन्य सम्मान समारोह की भी योजना बनाई गई है।
इस यात्रा को अमेरिका-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और रणनीतिक मुद्दों को लेकर कई स्तरों पर मतभेद रहे हैं। हालांकि, बैठक से पहले किसी नए समझौते या ठोस परिणाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।