Pakistan Airstrikes Afghanistan (नई दिल्ली): पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पूर्व विदेश राज्य मंत्री और वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर ने इस्लामाबाद की सैन्य कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। 25 सितंबर को ANI से बातचीत में अकबर ने कहा कि पाकिस्तान अब अफगानिस्तान के साथ भी युद्ध की स्थिति में है और उसके लिए युद्ध एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया जैसा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कथित तौर पर समस्याओं के समाधान के लिए युद्ध के अलावा दूसरे रास्तों पर पर्याप्त भरोसा नहीं करता।
एमजे अकबर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार तनाव बढ़ा हुआ है। पाकिस्तान ने 24 सितंबर को अफगानिस्तान में 10 ठिकानों पर हवाई और ड्रोन हमले करने की जानकारी दी थी। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के अनुसार, इन स्थानों का इस्तेमाल ड्रोन रखने और उन्हें पाकिस्तान की ओर भेजने के लिए किया जा रहा था। पाकिस्तान ने अपनी कार्रवाई को आत्मरक्षा और सैन्य ठिकानों तक सीमित कार्रवाई बताया।

Pakistan Airstrikes Afghanistan: अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन ने पाकिस्तान की कार्रवाई की निंदा की है और जवाब देने की बात कही है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद सुरक्षा संबंधी तनाव और बढ़ गया है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्ष लंबे समय से एक-दूसरे पर आतंकवादी समूहों को पनाह देने या अपनी जमीन का इस्तेमाल दूसरे देश के खिलाफ गतिविधियों के लिए होने देने के आरोप लगाते रहे हैं।
अकबर ने पाकिस्तान और तालिबान के संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तालिबान के निर्माण में पाकिस्तान की भूमिका रही है और ऐसे में तालिबान सरकार वाले अफगानिस्तान के साथ युद्ध की स्थिति को लेकर पाकिस्तान के रुख पर सवाल उठते हैं। यह अकबर का आकलन है और इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष अब केवल कभी-कभार होने वाली सीमा झड़पों तक सीमित नहीं दिख रहा है। उनके अनुसार, हवाई हमलों और ड्रोन गतिविधियों ने संघर्ष को अधिक लगातार स्वरूप दिया है।
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Pakistan Airstrikes Afghanistan: अकबर ने इस घटनाक्रम को पश्चिम एशिया में चल रहे सऊदी अरब और हूती संघर्ष से भी जोड़कर देखा। उन्होंने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में परिस्थितियां ऐसी बन सकती हैं, जहां पाकिस्तान अफगानिस्तान के संदर्भ में सऊदी अरब से मदद की अपेक्षा करे।
हालांकि, पाकिस्तान-अफगानिस्तान विवाद और सऊदी अरब-हूती संघर्ष अलग-अलग क्षेत्रीय सुरक्षा संकट हैं। दोनों के बीच किसी संभावित प्रत्यक्ष सैन्य संबंध को लेकर अभी स्पष्ट आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
फिलहाल पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव का मुख्य केंद्र सीमा पार हमले, ड्रोन गतिविधियां और आतंकवादी संगठनों से जुड़े आरोप हैं। पाकिस्तान अपनी सैन्य कार्रवाइयों को सुरक्षा और आत्मरक्षा से जोड़ रहा है, जबकि तालिबान प्रशासन इन्हें अफगानिस्तान की संप्रभुता के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधों पर घटनाक्रम का असर महत्वपूर्ण रहेगा।