Global Oil Market (नई दिल्ली): वैश्विक तेल बाजार में पहले से बनी तंग आपूर्ति स्थिति के बीच किसी भी बड़ी सप्लाई बाधा से बाजार में घाटा और बढ़ सकता है। S&P Global Energy के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में तेल की भौतिक उपलब्धता पर दबाव बना हुआ है और सप्लाई में अतिरिक्त व्यवधान बाजार के संतुलन को और प्रभावित कर सकते हैं। एशिया समेत कई प्रमुख तेल आयातक बाजारों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है
S&P Global Energy की हालिया विश्लेषणात्मक रिपोर्टों में बताया गया है कि मध्य-पूर्व में जारी व्यवधानों ने तेल आपूर्ति और परिवहन मार्गों पर दबाव बढ़ाया है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े जोखिमों ने एशियाई देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा की चिंता बढ़ाई है।
S&P Global के मुताबिक, एशिया की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था मौजूदा संकट से प्रभावित हुई है। कंपनी के अनुसार, 2025 में एशिया के मध्य-पूर्व से आने वाले कच्चे तेल के लगभग 75 प्रतिशत आयात ने होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल किया था। 2026 की तीसरी तिमाही में शिप-ट्रैकिंग आंकड़ों के आधार पर यह हिस्सेदारी काफी कम होकर करीब 10 से 20 प्रतिशत के बीच रही। इससे पता चलता है कि तेल कंपनियां और कारोबारी वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।
Global Oil Market: हालांकि, वैकल्पिक मार्गों के इस्तेमाल से सप्लाई पूरी तरह रुकने से बच सकती है, लेकिन इससे लागत बढ़ती है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य-पूर्व से तेल की आवाजाही बनाए रखने के लिए ओमान के पास शिप-टू-शिप ट्रांसफर जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल बढ़ा है। सितंबर में ऐसी गतिविधियों का अनुमानित स्तर अगस्त की तुलना में काफी अधिक रहा, जबकि टैंकरों की लागत भी बढ़ी है।
S&P Global Energy ने इससे पहले APPEC 2026 सम्मेलन के दौरान भी एशिया में तेल की लागत और उपलब्धता को लेकर दबाव की बात कही थी। रिपोर्ट के मुताबिक, बाधित समुद्री मार्ग, टैंकरों की सीमित उपलब्धता और रिफाइनिंग क्षमता से जुड़ी चुनौतियों के कारण एशिया में ऊर्जा लागत कुछ समय तक ऊंची रह सकती है।
तेल की कीमतों में तेजी का असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहता। कच्चे तेल की महंगी सप्लाई से परिवहन, पेट्रोकेमिकल, विमानन और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों की लागत प्रभावित हो सकती है। S&P Global की सितंबर की आर्थिक रिपोर्ट में भी ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी को महंगाई के लिए जोखिम बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, हालिया सप्लाई चिंताओं के बीच Brent crude फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया था।
Global Oil Market: भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए भी वैश्विक सप्लाई में लंबे समय तक व्यवधान महत्वपूर्ण हो सकता है। भारत की कच्चे तेल की आयात निर्भरता ऊंची बनी हुई है और महंगा आयात देश के व्यापार संतुलन तथा घरेलू लागत पर दबाव डाल सकता है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-अगस्त 2026 के दौरान भारत का कच्चे तेल का आयात बिल सालाना आधार पर 48.4 प्रतिशत बढ़कर 74.8 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात मात्रा में मामूली कमी आई।
फिलहाल बाजार के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि मध्य-पूर्व में सप्लाई संबंधी व्यवधान कितने समय तक जारी रहते हैं। यदि वैकल्पिक मार्गों और अन्य उत्पादक देशों से अतिरिक्त आपूर्ति के जरिए कमी पूरी होती है, तो बाजार पर दबाव सीमित रह सकता है। लेकिन भौतिक सप्लाई में और बाधा आने पर तेल बाजार में घाटा बढ़ने और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव की संभावना बनी रहेगी।