SIR विवाद (बेंगलुरु): कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का दोबारा सत्यापन कराया जाना चाहिए और CEC को तत्काल गिरफ्तार कर पद से हटाया जाना चाहिए। ये बयान बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग और CEC के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन के दौरान सामने आए।
डीके शिवकुमार ने SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्ति जताते हुए री-वेरिफिकेशन की मांग की। उनका कहना है कि पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी है। इससे पहले भी वह कर्नाटक में मतदाता सूची के नए सिरे से पुनरीक्षण की मांग कर चुके हैं और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठा चुके हैं।
चुनाव आयोग में कथित मतभेद का मुद्दा
SIR को लेकर विवाद उस रिपोर्ट के बाद और बढ़ा, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान चुनावी सूची और संबंधित प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता नामों को हटाने और डेटाबेस से जुड़े मामलों पर भी मतभेद का उल्लेख किया गया था।
इन रिपोर्टों के बाद विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। डीके शिवकुमार ने भी इसी संदर्भ में SIR के दोबारा सत्यापन की मांग रखी है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर अलग पक्ष रखा है। आयोग के सूत्रों के अनुसार, किसी मुद्दे पर व्यक्तिगत राय या आपत्ति होना संस्थागत निर्णय से अलग है और पिछले एक साल में SIR सहित आयोग के सभी अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के साथ सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
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SIR विवाद: कांग्रेस नेताओं ने भी उठाई आवाज
बेंगलुरु में हुए प्रदर्शन में कांग्रेस नेता दिनेश गुंडू राव ने भी CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर चिंता जताई। पूर्व मंत्री एचके पाटिल ने भी CEC से पद छोड़ने की मांग की।
इस बीच कर्नाटक में SIR प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में लाखों मतदाताओं को SIR से संबंधित नोटिस दिए जा चुके हैं। सरकार और विपक्ष के बीच मुख्य विवाद इस बात को लेकर है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम और मतदान के अधिकार सुरक्षित कैसे रखे जाएं।
SIR को लेकर विवाद अब केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है। विभिन्न विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग अपने निर्णयों को सर्वसम्मत बताता रहा है। ऐसे में आगे की कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया पर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।