UPI MDR 2026 (नई दिल्ली): UPI के जरिए शेयर बाजार और ब्रोकिंग से जुड़े भुगतान पर लागू होने वाले नए Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर बहस जारी है। इसी बीच नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के MD एवं CEO आशीष चौहान ने कहा है कि नई UPI MDR व्यवस्था को लेकर सरकार के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मामले को ब्रोकर और उनके ग्राहक आपसी स्तर पर सुलझा सकते हैं।
नई व्यवस्था के तहत कैपिटल मार्केट से जुड़े UPI लेनदेन, जिनमें स्टॉकब्रोकर, सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड से संबंधित भुगतान शामिल हैं, पर 0.02 प्रतिशत MDR लागू किया जाना है। इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन तय की गई है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है।
सरकार से नई MDR दर पर बातचीत नहीं
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, NSE प्रमुख आशीष चौहान ने स्पष्ट किया कि नई UPI MDR दरों को लेकर सरकार के साथ किसी नई बातचीत की जानकारी नहीं है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब ब्रोकिंग इंडस्ट्री की ओर से प्रस्तावित MDR को लेकर लागत और इसके व्यावहारिक असर पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
ब्रोकर्स की मुख्य चिंता यह है कि ग्राहक UPI के जरिए अपने ट्रेडिंग अकाउंट में पैसा जमा कर सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह उसी राशि से तत्काल कोई ट्रेड करे। ऐसे में ब्रोकरेज कंपनी को UPI लेनदेन पर MDR का खर्च उठाना पड़ सकता है, जबकि उस ट्रांसफर से उसे तत्काल कोई ब्रोकरेज आय नहीं होती।
UPI MDR 2026: ब्रोकर्स ने उठाई लागत की चिंता
नए MDR ढांचे को लेकर ब्रोकिंग कंपनियों और म्यूचुअल फंड से जुड़े पक्षों ने अपनी चिंताएं बाजार नियामक SEBI के सामने रखी हैं। SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 17 सितंबर को कहा था कि नियामक इन चिंताओं को देखेगा और यह समझने की कोशिश करेगा कि समस्याओं को किस तरह कम किया जा सकता है।
ब्रोकरों का तर्क है कि UPI के जरिए बड़ी रकम ट्रांसफर होने पर प्रतिशत के आधार पर MDR बढ़ सकता है। वहीं ग्राहक द्वारा पैसा ट्रांसफर करने के बाद ट्रेड नहीं करने की स्थिति में भी ब्रोकरेज को भुगतान लागत वहन करनी पड़ सकती है।
Zerodha के सह-संस्थापक नितिन कामथ ने भी इस व्यवस्था को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि ब्रोकिंग क्षेत्र के लिए कम MDR और छोटी लेनदेन सीमा वाला मॉडल अधिक व्यावहारिक हो सकता है।
कैपिटल मार्केट के लिए 0.02% MDR
केंद्र सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, नए UPI ढांचे में कैपिटल मार्केट से जुड़े लेनदेन के लिए 0.02 प्रतिशत MDR निर्धारित है और प्रति लेनदेन इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह MDR ग्राहकों से सीधे वसूला जाने वाला UPI शुल्क नहीं है।
सरकार के मुताबिक सामान्य व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा। 2,000 रुपये तक के अधिकांश P2M भुगतान भी MDR से बाहर रहेंगे। सरकार का कहना है कि करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेनदेन नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।
UPI MDR 2026: बदलाव की संभावना पर नजर
ब्रोकिंग उद्योग की चिंताओं के बीच MDR की संरचना में बदलाव को लेकर बाजार में चर्चा भी हुई है। Business Standard की एक रिपोर्ट के अनुसार, कैपिटल मार्केट से जुड़े UPI लेनदेन के लिए प्रतिशत आधारित MDR की जगह करीब 5 रुपये का फ्लैट शुल्क प्रस्तावित किए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि, ऐसी व्यवस्था के लिए SEBI, RBI और सरकार की मंजूरी की जरूरत होगी।
फिलहाल NSE प्रमुख का कहना है कि सरकार के साथ नई दरों को लेकर कोई बातचीत नहीं हो रही है। दूसरी ओर SEBI ने ब्रोकर्स की चिंताओं की समीक्षा करने की बात कही है। ऐसे में 15 अक्टूबर से प्रस्तावित MDR व्यवस्था लागू होने से पहले इस मुद्दे पर आगे क्या बदलाव होते हैं, इस पर बाजार की नजर बनी हुई है।