Digital Detox: स्क्रीन टाइम और खराब पोस्चर बन रहे बच्चों की रीढ़ के दुश्मन, डिजिटल डिटॉक्स से सिखाएं ये अच्छी आदतें

Digital Detox: आज के दौर में पढ़ाई, मनोरंजन और दोस्तों से बातचीत तक बच्चों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा डिजिटल स्क्रीन से जुड़ गया है। मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर और गेमिंग डिवाइस का इस्तेमाल सुविधाजनक जरूर है, लेकिन लंबे समय तक बैठे रहना और स्क्रीन देखते समय गर्दन झुकाए रखना बच्चों के शरीर पर असर डाल सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की 2026 की तकनीकी रिपोर्ट में लंबे डिजिटल मीडिया इस्तेमाल और गर्दन-कंधे के दर्द की अधिक आवृत्ति के बीच संबंध का उल्लेख किया गया है।

गर्दन और पीठ पर पड़ सकता है असर

मोबाइल या टैबलेट को नीचे रखकर लंबे समय तक देखने पर बच्चा लगातार गर्दन झुकाए रह सकता है। इसी तरह सोफे, बिस्तर या फर्श पर गलत मुद्रा में बैठकर घंटों स्क्रीन देखने से शरीर की मुद्रा पर दबाव पड़ सकता है। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की सिफारिशों में भी स्क्रीन इस्तेमाल के दौरान खराब पोस्चर और गर्दन की रीढ़ पर बढ़ते तनाव को लेकर सावधानी बताई गई है।

हालांकि, हर बच्चे में स्क्रीन इस्तेमाल से रीढ़ की स्थायी समस्या होना तय नहीं है। समस्या का जोखिम कम करने के लिए स्क्रीन के साथ-साथ बैठने की मुद्रा, शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त आराम पर ध्यान देना जरूरी है।

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Digital Detox: बच्चों को सिखाएं ये डिजिटल डिटॉक्स आदतें

1. स्क्रीन देखते समय पोस्चर सही रखें
बच्चे को पीठ के सहारे सीधा बैठने और गर्दन को लगातार नीचे झुकाने से बचने की आदत डालें। स्क्रीन को ऐसी ऊंचाई पर रखें कि उसे देखने के लिए बहुत ज्यादा गर्दन न झुकानी पड़े। AAP भी बच्चों के लिए ऐसा वर्कस्टेशन रखने की सलाह देता है जो उनकी लंबाई के अनुसार हो।

2. लगातार स्क्रीन के सामने न बैठें
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठकर चलना, शरीर को आराम देना और गतिविधि करना जरूरी है। WHO बच्चों और किशोरों में लंबे समय तक बैठे रहने, खासकर मनोरंजन के लिए स्क्रीन इस्तेमाल को सीमित करने की सलाह देता है।

3. पढ़ाई और मनोरंजन का स्क्रीन टाइम अलग करें
हर स्क्रीन गतिविधि को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए। ऑनलाइन पढ़ाई जरूरी हो सकती है, जबकि मनोरंजन के लिए स्क्रीन का इस्तेमाल अलग है। AAP की नई गाइडेंस भी केवल घंटों की संख्या के बजाय स्क्रीन के इस्तेमाल की गुणवत्ता और इस बात पर ध्यान देने की सलाह देती है कि डिजिटल मीडिया नींद, खेल, पढ़ाई और शारीरिक गतिविधि की जगह न ले।

4. खाने और सोने के समय स्क्रीन से दूरी रखें
परिवार में भोजन के समय और सोने से पहले स्क्रीन-फ्री नियम बनाया जा सकता है। AAP बच्चों के लिए सोने से लगभग एक घंटे पहले स्क्रीन बंद करने और डिवाइस को बेडरूम से बाहर रखने की सलाह देता है।

5. आउटडोर खेल को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं
साइकिल चलाना, पैदल चलना, खेलना या अन्य उम्र के अनुसार शारीरिक गतिविधियां बच्चों को लंबे समय तक बैठे रहने से बचा सकती हैं। WHO भी बच्चों और किशोरों में sedentary behaviour कम करने और शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देने पर जोर देता है।

Digital Detox: माता-पिता खुद भी बनें उदाहरण

बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर परिवार का माहौल भी असर डालता है। इसलिए केवल बच्चे को फोन छोड़ने के लिए कहने के बजाय माता-पिता भी भोजन, बातचीत और पारिवारिक समय के दौरान फोन अलग रखने की आदत अपनाएं। WHO के अनुसार डिजिटल तकनीक के फायदे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन बच्चों के स्वास्थ्य और विकास के लिए इनके इस्तेमाल को संतुलित करना जरूरी है।

अगर बच्चे को लगातार गर्दन, पीठ या कंधे में दर्द रहता है, गतिविधियों में परेशानी होती है या समस्या बार-बार बनी रहती है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।

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