Mahanadi Water Dispute (नई दिल्ली): ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को सुलझाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में गुरुवार को नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच महानदी के जल बंटवारे और प्रबंधन को लेकर सहमति का रास्ता तलाशना है।
लंबे समय से जारी है विवाद
महानदी जल विवाद दोनों राज्यों के बीच एक दशक से अधिक समय से चला आ रहा है। विवाद मुख्य रूप से महानदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के उपयोग तथा ऊपरी हिस्से में बनाए गए जल ढांचों से जुड़ा है। ओडिशा लंबे समय से छत्तीसगढ़ में बनाए गए बैराजों को लेकर आपत्ति जताता रहा है। उसका कहना है कि इन संरचनाओं का असर खासकर गैर-मानसूनी अवधि में ओडिशा की ओर आने वाले पानी के प्रवाह पर पड़ता है।
ओडिशा सरकार ने 2016 में केंद्र के समक्ष इस मुद्दे को उठाया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया। विवाद के समाधान के लिए न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ केंद्र की ओर से बातचीत और तकनीकी स्तर पर भी प्रयास जारी रहे हैं।
Mahanadi Water Dispute: CWC के फैसले को स्वीकार करने की सहमति
बैठक से पहले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दोनों राज्यों ने केंद्रीय जल आयोग यानी CWC के निर्णय को स्वीकार करने की सहमति जताई है। उनके अनुसार, दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने CWC को पत्र लिखकर कहा है कि राज्यों के हित में आयोग जो फैसला करेगा, उसे स्वीकार किया जाएगा।
यह पहल विवाद को बातचीत और तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि अंतिम समाधान के लिए जल उपलब्धता, उपयोग और दोनों राज्यों की जरूरतों से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर सहमति आवश्यक होगी।
पहले भी हुई थी उच्चस्तरीय बातचीत
महानदी विवाद को लेकर जुलाई 2026 में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक हुई थी। केंद्र ने उस बैठक में बातचीत, तकनीकी सहयोग और सहकारी संघवाद के माध्यम से विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान पर जोर दिया था। संयुक्त तकनीकी समिति की बैठकों में कई तकनीकी मुद्दों पर सहमति बनने की जानकारी भी केंद्र सरकार ने दी थी।
इसके बाद दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच भी बातचीत जारी रही। सितंबर में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मुलाकात में महानदी समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई थी। दोनों पक्षों की ओर से विवाद के समाधान को लेकर सकारात्मक रुख सामने आया था।
Mahanadi Water Dispute: समाधान की दिशा में बढ़ी उम्मीद
महानदी जल विवाद का समाधान ओडिशा और छत्तीसगढ़ दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि नदी का पानी कृषि, पेयजल, उद्योग और अन्य जरूरतों से जुड़ा हुआ है। केंद्र की मध्यस्थता में हो रही लगातार बैठकों से दोनों राज्यों के बीच बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
हालांकि बैठक के बाद किसी अंतिम समझौते की घोषणा को अलग से आधिकारिक रूप से देखना जरूरी होगा। फिलहाल दोनों राज्यों की ओर से केंद्रीय जल आयोग की प्रक्रिया और आपसी बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की सहमति सामने आई है।