नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।
प्रदर्शन के दौरान पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पार्टी का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता है ताकि युवाओं का भरोसा बहाल किया जा सके।
पार्टी की 5 प्रमुख मांगें
1. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
कॉकरोच जनता पार्टी ने परीक्षा प्रबंधन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
2. प्रतियोगी परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता
पार्टी ने मांग की कि सभी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए और परीक्षा प्रक्रिया की स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित की जाए।
3. पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई
प्रदर्शनकारियों ने पेपर लीक और परीक्षा घोटालों में शामिल लोगों के खिलाफ त्वरित जांच और कठोर दंड की मांग की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।
4. युवाओं के लिए जवाबदेही तंत्र
पार्टी ने कहा कि परीक्षा रद्द होने या प्रशासनिक गड़बड़ियों से प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए स्पष्ट जवाबदेही और मुआवजा नीति बनाई जानी चाहिए।
5. भर्ती प्रक्रियाओं में समयबद्धता
सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने और रिक्त पदों को शीघ्र भरने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में युवा और छात्र शामिल हुए। आयोजकों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं की समस्याओं को सामने लाने के लिए है।
हालांकि जंतर-मंतर पर किसी भी प्रदर्शन के लिए प्रशासनिक अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। प्रदर्शन को लेकर पुलिस और प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी गई।
कॉकरोच जनता पार्टी का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। वहीं सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रदर्शन के बाद शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुधार और युवाओं के भविष्य को लेकर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है।