नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार की निगाहें एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, फारस की खाड़ी में कच्चे तेल से लदे करीब 40 विशालकाय क्रूड कैरियर जहाज जलडमरूमध्य पार कर अपने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों की ओर बढ़ने की तैयारी में हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां होने वाली किसी भी गतिविधि पर अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा क्षेत्र की विशेष नजर रहती है। क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए जहाज संचालकों और समुद्री एजेंसियों को नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और किसी भी संभावित जोखिम को कम करना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात सामान्य बना रहता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर तत्काल किसी बड़े प्रभाव की आशंका कम होगी। हालांकि क्षेत्रीय तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
भारत सहित कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र से आने वाले कच्चे तेल पर निर्भर हैं। इसलिए इस समुद्री मार्ग की स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, तेल टैंकरों की आवाजाही जारी रहना वैश्विक बाजारों के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे यह संदेश जाता है कि मौजूदा परिस्थितियों के बावजूद तेल आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।फिलहाल दुनिया भर के ऊर्जा बाजार, शिपिंग कंपनियां और सरकारें होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यहां की गतिविधियां सीधे तौर पर वैश्विक तेल कीमतों और व्यापार पर असर डाल सकती हैं।