किडनी ट्रांसप्लांट में अब बढ़ेगी पारदर्शिता, अस्पतालों को सार्वजनिक करनी होगी सफलता और मृत्यु दर

नई दिल्ली :- देश में किडनी प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों के हित में राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) ने बड़ा फैसला लिया है। अब सभी किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले अस्पतालों को अपनी सफलता दर (Success Rate), मरीजों के जीवित रहने की दर, मृत्यु दर (Mortality Rate) और ग्राफ्ट फेल होने के आंकड़े सार्वजनिक करने होंगे। इस कदम का उद्देश्य मरीजों को सही जानकारी उपलब्ध कराना और अस्पतालों की जवाबदेही बढ़ाना है।

 

अब तक अधिकांश मरीजों के पास यह जानकारी नहीं होती थी कि किसी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के परिणाम कितने सफल रहे हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीज और उनके परिजन विभिन्न अस्पतालों के प्रदर्शन की तुलना कर सकेंगे और बेहतर जानकारी के आधार पर इलाज का निर्णय ले पाएंगे।

 

NOTTO ने अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे केवल ट्रांसप्लांट की संख्या ही नहीं, बल्कि ऑपरेशन के बाद मरीजों की दीर्घकालिक स्थिति, ग्राफ्ट के सफल रहने की अवधि और अन्य महत्वपूर्ण परिणाम भी सार्वजनिक करें। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थानों की पहचान भी आसान होगी।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से अस्पतालों के बीच गुणवत्ता सुधार की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। साथ ही, मरीजों का भरोसा भी मजबूत होगा क्योंकि वे वास्तविक आंकड़ों के आधार पर अस्पताल का चयन कर सकेंगे। यह पहल देश में अंग प्रत्यारोपण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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