नई दिल्ली: E20 पेट्रोल को लेकर चल रहे विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा हाल ही में दिए गए फैसले के बाद यह बहस तेज हो गई है कि वाहनों में आ रही समस्याओं की वजह E20 ईंधन है, ईंधन की ब्लेंडिंग प्रक्रिया है या फिर मिलावटी (Adulterated) ईंधन।
रायपुर उपभोक्ता आयोग ने एक मामले में मारुति सुजुकी को ग्रैंड विटारा कार बदलने या ग्राहक को लगभग 20.5 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया। आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। हालांकि, मारुति सुजुकी ने इस आदेश को उच्च मंच पर चुनौती देने की बात कही है।
मामले की जांच के दौरान ईंधन के नमूनों की जांच में यह सामने आया कि ईंधन में एथेनॉल मौजूद था, लेकिन कुछ रिपोर्टों में फेज़ सेपरेशन (Phase Separation) जैसी स्थिति की भी चर्चा हुई, जिसमें एथेनॉल और पेट्रोल अलग-अलग परतों में विभाजित हो सकते हैं। इसी कारण यह सवाल उठा कि समस्या का कारण ईंधन की गुणवत्ता थी या वाहन की अनुकूलता।
दूसरी ओर, सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) का कहना है कि उन्होंने देशभर में हजारों पेट्रोल पंपों का निरीक्षण किया और व्यापक स्तर पर ईंधन में मिलावट या गुणवत्ता संबंधी कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं पाई। कंपनियों ने उपभोक्ताओं से अपुष्ट सोशल मीडिया दावों पर भरोसा न करने की अपील भी की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले से जुड़े सभी तकनीकी और कानूनी पहलुओं की अंतिम स्पष्टता उच्च अदालतों या आगे की जांच के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी वाहन संबंधी समस्याओं के लिए केवल E20 ईंधन ही जिम्मेदार है।
इस बीच, E20 पेट्रोल को लेकर देशभर में बहस जारी है। केंद्र सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से कच्चे तेल के आयात में कमी, किसानों की आय में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, जबकि कुछ वाहन मालिक प्रदर्शन और माइलेज को लेकर अपनी चिंताएं जता रहे हैं।