MSME Reform: एमएसएमई तंत्र को मजबूत करने के लिए सुधारों का अगला चरण, जीतन राम मांझी ने गिनाए फायदे

नई दिल्ली। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 का संसद के दोनों सदनों से पारित होना देश के MSME क्षेत्र को बदलते आर्थिक और कारोबारी माहौल के अनुरूप मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मांझी के अनुसार, पिछले दो दशकों में लाखों उद्यम औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बने हैं। MSME क्षेत्र आज देश के विकास, रोजगार सृजन और निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नए संशोधन का उद्देश्य पंजीकरण को आसान बनाने, उद्यमों के वर्गीकरण को बेहतर करने, ऋण तक पहुंच बढ़ाने, समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और विवादों के तेजी से निपटारे की व्यवस्था को मजबूत करना है।

मुफ्त और स्वैच्छिक पंजीकरण की व्यवस्था

संशोधन में उद्यमों के लिए मुफ्त और स्वैच्छिक पंजीकरण की सुविधा देने वाले राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रावधान किया गया है। इससे MSME क्षेत्र में औपचारिक रूप से शामिल होने की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है।

सरकार के अनुसार, अधिनियम के तहत पंजीकरण को पात्रता के रूप में देखा गया है और यह कंपनियों के लिए अनिवार्य नहीं होगा।

निवेश और कारोबार के आधार पर होगा वर्गीकरण

नए प्रावधान में उद्यमों के वर्गीकरण के लिए संयंत्र, मशीनरी या उपकरणों में निवेश और कारोबार को संयुक्त मानदंड बनाया गया है। इससे बदलती तकनीक, लागत, बाजार और कारोबारी मॉडल के अनुरूप वर्गीकरण व्यवस्था को समय के साथ बदला जा सकेगा।

केंद्र सरकार को अधिसूचना के माध्यम से वर्गीकरण की सीमाएं निर्धारित करने का अधिकार भी दिया गया है।

MSME के समय पर भुगतान पर जोर

MSME क्षेत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक समय पर भुगतान नहीं मिलना है। भुगतान में देरी का सीधा असर छोटे कारोबारियों के नकदी प्रवाह, कर्मचारियों के वेतन, कच्चे माल की खरीद और नए ऑर्डर लेने की क्षमता पर पड़ता है।

इसी समस्या से निपटने के लिए संशोधन में रोकथाम, समाधान और कार्यान्वयन के तीन स्तरों पर व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई है।

TReDS से मिलेगी भुगतान में मदद

केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए TReDS (Trade Receivables Discounting System) के माध्यम से MSME से संबंधित इनवॉइस और भुगतान की जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है। राज्य सरकारें भी अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए ऐसी व्यवस्था लागू कर सकती हैं।

TReDS के जरिए स्वीकृत इनवॉइस के आधार पर बैंक और वित्तीय संस्थान MSME को जल्द वित्त उपलब्ध करा सकते हैं। इससे आपूर्तिकर्ता को भुगतान का इंतजार किए बिना अपनी कार्यशील पूंजी की जरूरत पूरी करने में मदद मिल सकती है।

विवादों के ऑनलाइन समाधान को मान्यता

संशोधन में MSME से जुड़े विवादों के समाधान की प्रक्रिया को भी मजबूत किया गया है। राज्य सरकारों को अतिरिक्त सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषदों (MSEFC) की स्थापना करने में सक्षम बनाया गया है।

इसके अलावा मध्यस्थता और सुलह के लिए समय-सीमा तय करने तथा ऑनलाइन विवाद समाधान को वैधानिक मान्यता देने का प्रावधान किया गया है। इससे लंबे समय तक चलने वाले विवादों को तेजी से निपटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अदालत में चुनौती देने पर 75 प्रतिशत राशि जमा करने का प्रावधान

फैसले को अदालत में चुनौती देने की स्थिति में खरीदार को निर्धारित राशि का 75 प्रतिशत जमा करना होगा। यदि चुनौती छह महीने तक लंबित रहती है, तो अदालत जमा राशि का एक हिस्सा आपूर्तिकर्ता को जारी कर सकती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य लंबे समय तक चलने वाली मुकदमेबाजी के कारण MSME के जायज भुगतान को अटकने से रोकना है।

छोटे उल्लंघनों पर पहली बार चेतावनी

संशोधन में MSME के लिए अनुपालन व्यवस्था को अधिक विश्वास-आधारित और संतुलित बनाने पर भी जोर दिया गया है। छोटे-मोटे उल्लंघनों पर पहली बार चेतावनी देने और दोबारा उल्लंघन होने पर आर्थिक जुर्माने की व्यवस्था की बात कही गई है।

मांझी के मुताबिक, आसान और अनुमानित अनुपालन व्यवस्था से कंपनियां नियमों की जटिलताओं के बजाय अपने कारोबार, नवाचार और विस्तार पर अधिक ध्यान दे सकेंगी।

‘विकसित भारत’ में MSME की अहम भूमिका

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह संशोधन MSME क्षेत्र में विश्वास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे छोटे और मध्यम उद्यमों को नवाचार, रोजगार सृजन, नए बाजारों में प्रवेश और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि मजबूत और गतिशील MSME क्षेत्र भारत को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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