पिथौरागढ़। बेहतर नौकरी और अच्छी कमाई की उम्मीद लेकर रूस गए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ निवासी दो भाइयों के लिए विदेश में नौकरी का सपना बेहद मुश्किल अनुभव बन गया। दोनों को हर महीने 50 हजार रुपये वेतन मिलने की बात कही गई थी, लेकिन तीन महीने के दौरान उन्हें कुल मिलाकर सिर्फ 17,500 रुपये ही दिए गए।
परिजनों के मुताबिक, दोनों भाइयों को विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर एक ट्रैवल एजेंसी के जरिए रूस भेजा गया था। रिपोर्टों के अनुसार, उनसे करीब 8 लाख रुपये भी लिए गए थे। रूस पहुंचने के बाद उन्हें कथित तौर पर वादे के मुताबिक काम नहीं मिला और उनकी इच्छा के विपरीत दूसरे काम कराए गए।
97 दिन तक रूस में फंसे रहे दोनों भाई
स्थिति बिगड़ने के बाद दोनों भाइयों के लिए रूस से वापस लौटना आसान नहीं रहा। परिवार की चिंता उस समय और बढ़ गई, जब उनसे संपर्क भी मुश्किल होने लगा। परिजनों ने पूरे मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई।
मामला उत्तराखंड सरकार के संज्ञान में आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों की सुरक्षित वापसी के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। राज्य सरकार ने विदेश मंत्रालय और रूस स्थित भारतीय दूतावास के साथ समन्वय कर वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। करीब 97 दिन बाद दोनों भाई सुरक्षित भारत लौट सके।
50 हजार वेतन का दावा, हाथ आए सिर्फ 17,500 रुपये
परिवार के अनुसार, दोनों भाइयों को रूस में नौकरी के बदले हर महीने करीब 50 हजार रुपये वेतन मिलने की बात कही गई थी। लेकिन तीन महीने की अवधि में उन्हें सिर्फ 17,500 रुपये दिए गए। इससे विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर किए गए दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस घटना ने विदेश में नौकरी के नाम पर युवाओं को भेजने वाली एजेंसियों की विश्वसनीयता और भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
परिवार ने ली राहत की सांस
97 दिनों की परेशानी के बाद दोनों भाइयों की सकुशल घर वापसी से परिवार ने राहत की सांस ली। इस मामले ने यह भी सामने ला दिया कि विदेश में नौकरी के लिए जाने से पहले भर्ती एजेंसी, नौकरी देने वाली कंपनी, वीजा और रोजगार अनुबंध से जुड़ी जानकारी की अच्छी तरह जांच करना बेहद जरूरी है।