Space war (वॉशिंगटन/मास्को):- दुनिया की जंग अब जमीन और समंदर से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुंच गई है। अमेरिका ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि उसने पृथ्वी की कक्षा में एक अंतरिक्ष हथियार तैनात कर दिया है। अमेरिकी वायुसेना के सेक्रेट्री ट्रॉय मिंक ने इसका ऐलान किया है, जिसके बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है।
हालांकि अमेरिका ने इस हथियार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है। उन्होंने सिर्फ इतना कहा है कि यह हथियार दुश्मनों की कार्रवाई से अमेरिकी सेनाओं की रक्षा के लिए जरूरी है। लेकिन यह क्या कर सकता है और इसे कब तैनात किया गया, इस पर अमेरिका ने चुप्पी साध रखी है।
Space war: अमेरिका ने कौन सा हथियार भेजा?
रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ डॉ. ब्लेडिन बोवेन के मुताबिक, यह कोई मिसाइल नहीं बल्कि इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम हो सकता है। यह दुश्मन के सैटेलाइट के सिग्नल को जाम कर सकता है। अगर किसी उपग्रह का रेडियो संपर्क काट दिया जाए तो वह लोहे के डिब्बे से ज्यादा कुछ नहीं रह जाता।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ऐसा एंटी-सैटेलाइट हथियार भी हो सकता है जो दूसरे उपग्रह को पूरी तरह नष्ट किए बिना उसे बेकार कर दे। यह किसी दूसरे उपग्रह के पास जाकर उसे पकड़ सकता है या उसकी कक्षा से बाहर धकेल सकता है।
Space war: रूस और चीन के पास भी हैं ऐसे हथियार?
अमेरिका अकेला नहीं है। रूस ने तो 1960 के दशक में ही ‘इस्त्रेबितेल स्पुतनिकोव’ यानी ‘उपग्रह को नष्ट करने वाला’ प्रोग्राम शुरू कर दिया था। इसके तहत ऐसे उपग्रह बनाए गए थे जो दूसरे उपग्रह की कक्षा में जाकर विस्फोट कर सकते है।
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पिछले 10 साल में रूस और चीन ने ‘रेंडेवू एंड प्रॉक्सिमिटी ऑपरेशन’ (RPO) में महारत हासिल की है, जिसमें एक उपग्रह दूसरे उपग्रह का पीछा करता है। किंग्स कॉलेज लंदन के डॉ. रॉड थॉर्नटन के मुताबिक, इन उपग्रहों को कभी भी हथियार में बदला जा सकता है। चीन ने तो ‘स्पेस टग’ तकनीक भी दिखा दी है जो किसी भी सैटेलाइट को खींचकर दूसरी कक्षा में ले जा सकती है।
चीन ने 2007 में जमीन से मिसाइल दागकर अपने ही एक पुराने मौसम उपग्रह को मार गिराया था। उसका मलबा आज भी अंतरिक्ष में घूम रहा है और दूसरे उपग्रहों के लिए खतरा बना हुआ है।
Space war: स्पेस वॉर में रूस क्यों पड़ेगा भारी?
यहीं पर सबसे बड़ा पेंच है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सच में अंतरिक्ष युद्ध हुआ तो इसका सबसे बड़ा विजेता रूस होगा। इसकी वजह बहुत ही सिंपल है।

अमेरिका और चीन के पास हजारों सैटेलाइट हैं। उनकी सेना, जीपीएस, बैंकिंग, इंटरनेट सब कुछ सैटेलाइट पर निर्भर है। वहीं रूस के पास बहुत कम उपग्रह हैं। यानी रूस के पास खोने के लिए कम है और दुश्मन का नुकसान ज्यादा करने की क्षमता है।
Space war: रूस के पास जमीन से अंतरिक्ष में मार करने वाली ASAT मिसाइलें हैं जो निचली कक्षा के उपग्रहों को पलक झपकते ही नष्ट कर सकती हैं। इसके अलावा रूस के पास आखिरी हथियार परमाणु बम है। थॉर्नटन के मुताबिक, रूस अंतरिक्ष में परमाणु विस्फोट कर सकता है, जिससे निकला EMP (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स) एक बड़े इलाके के सभी अन-सुरक्षित सैटेलाइट्स को जला देगा।
चीन ने अमेरिका के इस कदम का विरोध किया है और कहा है कि अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकनी चाहिए। लेकिन एक्सपर्ट्स चीन के इस बयान को चोर का दूसरे चोर को चोर कहना बता रहे हैं, क्योंकि चीन और रूस खुद सालों से इसकी तैयारी कर रहे हैं।