BNSS Notice (लखनऊ): उत्तर प्रदेश पुलिस ने BNSS की धारा 35(3) के तहत जारी होने वाले नोटिस की तामील को लेकर पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के अनुपालन में बताया जा रहा है, जिसमें अदालत ने स्पष्ट किया था कि धारा 35 के तहत जारी नोटिस की सेवा WhatsApp या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से करना निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने सतेन्द्र कुमार अंतिल बनाम CBI मामले में 16 जुलाई 2025 के आदेश में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस को धारा 41-A CrPC और BNSS की धारा 35 से संबंधित नोटिस कानून में निर्धारित तरीके से तामील करने के निर्देशों का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि WhatsApp या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नोटिस भेजना निर्धारित सेवा प्रक्रिया का वैकल्पिक या स्थानापन्न तरीका नहीं माना जा सकता।
क्या है BNSS की धारा 35(3)?
BNSS की धारा 35 उस स्थिति से संबंधित है, जब पुलिस किसी ऐसे व्यक्ति को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी करती है, जिसकी गिरफ्तारी उस समय आवश्यक नहीं मानी गई है। धारा 35(3) के तहत संबंधित व्यक्ति को पुलिस अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के लिए नोटिस दिया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि नोटिस का पालन नहीं करने मात्र से व्यक्ति की गिरफ्तारी अपने आप अनिवार्य नहीं हो जाती। गिरफ्तारी की आवश्यकता के संबंध में जांच अधिकारी को कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से निर्णय लेना होता है और इसके लिए निर्धारित कारणों का पालन करना जरूरी है।
BNSS Notice: WhatsApp और ई-मेल से नोटिस पर क्या कहा कोर्ट ने?
अदालत के सामने यह तर्क भी रखा गया था कि BNSS में कुछ परिस्थितियों में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से समन की सेवा की अनुमति है, इसलिए धारा 35 के नोटिस के लिए भी ऐसा माध्यम इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने धारा 35 के नोटिस को अलग रखते हुए कहा कि इसकी सेवा के लिए BNSS में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि धारा 35 के नोटिस का पालन न करने के परिणाम व्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए नोटिस की सेवा की प्रक्रिया को केवल तकनीकी औपचारिकता के रूप में नहीं देखा जा सकता।
यूपी पुलिस ने जारी किया परिपत्र
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय की ओर से पुलिस अधिकारियों को धारा 35(3) के नोटिस की तामील कानून में निर्धारित तरीके से करने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परिपत्र संख्या 35/2025 में WhatsApp अथवा अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम को धारा 35(3) के नोटिस की वैधानिक तामील के विकल्प के रूप में इस्तेमाल न करने की बात कही गई है।
इसका मतलब यह है कि केवल WhatsApp, ई-मेल या इसी तरह के डिजिटल माध्यम से भेजे गए संदेश को धारा 35(3) के तहत निर्धारित नोटिस की वैधानिक सेवा मान लेने की प्रक्रिया पर रोक रहेगी। पुलिस को नोटिस की तामील के लिए BNSS में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
BNSS Notice: आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
धारा 35(3) का नोटिस मिलने की स्थिति में उसकी वैधानिक तामील और आगे की कार्रवाई को समझना महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि नोटिस का पालन न करने से स्वतः गिरफ्तारी नहीं होती, बल्कि गिरफ्तारी की आवश्यकता पर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाना होता है।
इस आदेश से पुलिस जांच में शामिल होने के लिए जारी होने वाले नोटिस की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता बढ़ती है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित होता है कि ऐसे नोटिस की सेवा कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप हो।