Chief Election Commissioner (नई दिल्ली): मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दलों की ओर से एक बार फिर संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। अब INDIA गठबंधन से बाहर की आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) से भी प्रस्ताव के समर्थन के लिए बातचीत की जा रही है।
जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्ष की कोशिश है कि CEC के खिलाफ प्रस्ताव को व्यापक राजनीतिक समर्थन मिले। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि इस मुद्दे पर विभिन्न दलों से बातचीत चल रही है। DMK की ओर से भी प्रस्ताव के समर्थन के संकेत दिए गए हैं। पार्टी प्रवक्ता टीकेएस इलांगोवन ने कहा कि उनकी पार्टी इस प्रस्ताव का समर्थन करेगी।
Chief Election Commissioner: SIR को लेकर विवाद के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की कार्रवाई का संबंध मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रहे विवाद से भी जोड़ा जा रहा है। हाल में आई एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद स्पष्ट किया कि विचारों में मतभिन्नता होना असामान्य नहीं है और SIR समेत हाल की कई पहलों पर अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इसलिए रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों और आयोग की आधिकारिक स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है।
पहले भी दिया जा चुका है नोटिस
CEC को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष पहले भी संसद में नोटिस दे चुका है। अप्रैल 2026 में लोकसभा और राज्यसभा के पीठासीन अधिकारियों ने विपक्ष द्वारा दिए गए पिछले नोटिसों को स्वीकार नहीं किया था। इससे प्रस्ताव आगे की संसदीय प्रक्रिया में नहीं बढ़ सका था।
अब विपक्ष नए सिरे से प्रस्ताव तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्ताव का मसौदा कानूनी विशेषज्ञों की सलाह से तैयार किया जा रहा है और दोनों सदनों में नोटिस देने की योजना है।
Chief Election Commissioner: CEC को हटाने की प्रक्रिया क्या है?
संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को सामान्य प्रशासनिक आदेश से नहीं हटाया जा सकता। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया और आधार पर हटाया जा सकता है। इसके लिए संसद की विशेष संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
यदि प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है तो आरोपों की जांच के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच समिति गठित की जा सकती है। आरोप साबित होने की स्थिति में दोनों सदनों को निर्धारित विशेष बहुमत से हटाने के प्रस्ताव को मंजूरी देनी होगी। केवल महाभियोग प्रस्ताव लाए जाने या सांसदों के हस्ताक्षर कर देने से CEC का पद स्वतः समाप्त नहीं होता।
फिलहाल विपक्ष की ओर से समर्थन जुटाने और प्रस्ताव के कानूनी प्रारूप पर चर्चा का दौर चल रहा है। AAP और अन्य दलों का अंतिम रुख तथा प्रस्ताव को संसदीय स्तर पर स्वीकार किए जाने के बाद की प्रक्रिया आगे की घटनाओं पर निर्भर करेगी।