India EU Trade Deal (नई दिल्ली): भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को लेकर स्पष्ट रुख रखा है। उन्होंने कहा कि यूरोप के साथ बातचीत के दौरान भारत अपने राष्ट्रीय हितों और नीतिगत स्वतंत्रता को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ेगा। उनका बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और भारत अमेरिका तथा यूरोपीय संघ समेत कई प्रमुख आर्थिक साझेदारों के साथ व्यापार संबंधों को आगे बढ़ा रहा है।
सीतारमण ने यूरोप के संदर्भ में कहा कि भारत के लिए किसी बाहरी कानून या दबाव के आधार पर अपनी नीतियां तय करने का सवाल नहीं है। इसी संदर्भ में उन्होंने अमेरिका में चर्चा में रहे लिंडसे ग्राहम से जुड़े कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि यूरोप में ऐसा कोई ‘लिंडसे ग्राहम बिल’ नहीं है। उनका यह बयान भारत की उस नीति को रेखांकित करता है जिसमें अलग-अलग देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापार संबंधों को आगे बढ़ाते हुए रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखने पर जोर दिया जाता है।
India EU Trade Deal: भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की स्थिति पर भी सीतारमण ने कहा कि दोनों देश फिलहाल एक ऐसे पड़ाव पर पहुंच गए हैं जहां आगे बढ़ना आसान नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत कठिन और व्यापक स्तर पर हुई है तथा आगे किसी संभावित गुंजाइश के आधार पर ही प्रगति की जा सकती है।
वहीं भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार संबंधों को लेकर हाल के महीनों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। यूरोपीय आयोग के अनुसार भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता पूरी हो चुकी है और अब समझौते को हस्ताक्षर तथा अंतिम प्रक्रिया की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। यूरोपीय पक्ष ने इसे दोनों क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण व्यापारिक अवसर बताया है।
इस समझौते का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यूरोपीय संघ भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। ऐसे में बाजार पहुंच, शुल्क में कमी, निवेश और व्यापार बाधाओं जैसे मुद्दे दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत के लिए चुनौती यह है कि व्यापार अवसरों को बढ़ाते हुए कृषि, विनिर्माण, रोजगार और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े घरेलू हितों की भी रक्षा की जाए।
यूरोप के साथ भारत के आर्थिक संबंधों का दायरा केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है। निवेश, सेवाएं, तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्र भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत पहले ही यूरोप में ईएफटीए देशों के साथ व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता कर चुका है, जिसमें निवेश और रोजगार से जुड़े महत्वपूर्ण लक्ष्य शामिल हैं।
कुल मिलाकर, निर्मला सीतारमण का बयान यह संकेत देता है कि भारत वैश्विक व्यापार समझौतों में सक्रिय भागीदारी के साथ अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों को भी प्राथमिकता देना चाहता है। आने वाले समय में भारत-ईयू व्यापार समझौते की अंतिम प्रक्रिया और भारत-अमेरिका वार्ता की दिशा वैश्विक व्यापार संबंधों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।