Supreme court news :- पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन बोले — मतदाताओं को सूची से हटाना लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता

Supreme court news :- नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से लोगों के बाहर होने से उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ता है और लोकतंत्र में मतदान का अधिकार बेहद महत्वपूर्ण है।

जस्टिस नरीमन ने यह टिप्पणी राजकोट के राजकुमार कॉलेज में संविधान और आम आदमी विषय पर आयोजित कार्यक्रम में की। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में कार्यपालिका की भूमिका को लेकर संवैधानिक स्तर पर विचार की आवश्यकता है।

Supreme court news मतदाता सूची से नाम हटाने पर जताई चिंता

जस्टिस नरीमन ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उल्लेख करते हुए दावा किया कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। उनके अनुसार करीब 90 लाख मतदाता प्रभावित हुए और इनमें से करीब 22 लाख लोगों ने अपील की। उन्होंने कहा कि जिन अपीलों का फैसला हुआ उनमें लगभग 93 प्रतिशत मामले मतदाताओं के पक्ष में गए।

हालांकि ये आंकड़े और जस्टिस नरीमन की व्याख्या उनके भाषण में किए गए दावों पर आधारित हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग का पक्ष यह है कि प्रक्रिया का उद्देश्य मृतकों के नाम हटाने के साथ ही दोहरे और अपात्र नामों को सूची से बाहर करना तथा पात्र मतदाताओं की सूची को व्यवस्थित करना है।

Supreme court news चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल

पूर्व न्यायाधीश ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े मौजूदा कानून को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने 2023 में बनाए गए कानून का उल्लेख किया जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति का प्रावधान है।

इस समिति में प्रधानमंत्री के साथ लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले में अंतरिम व्यवस्था के तौर पर प्रधानमंत्री लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति का प्रावधान किया गया था। बाद में संसद द्वारा बनाए गए कानून में मुख्य न्यायाधीश की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया।

जस्टिस नरीमन ने इस व्यवस्था को लेकर कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका उनकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर सवाल पैदा कर सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर जल्द विचार करेगा।

Supreme court news सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है मामला

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले से याचिकाएं लंबित हैं। सितंबर 2026 में दो न्यायाधीशों की पीठ ने मामले को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त की थी। इसके बाद मामला उचित पीठ के गठन के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा गया।

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वहीं एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को चुनौती दी है। आयोग की ओर से एसआईआर को मतदाता सूची को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया बताया गया है।

लोकतंत्र में मतदान के अधिकार को बताया अहम

जस्टिस नरीमन ने अपने संबोधन में मतदान के अधिकार को संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हट जाता है तो उसके सामने अपने अधिकार को वापस हासिल करने की चुनौती खड़ी हो जाती है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद जताई कि अदालत इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करेगी और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता तथा मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवालों पर उचित संवैधानिक समाधान सामने आएगा।

फिलहाल मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है। इस मामले में आगे होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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