लखनऊ। विदेश मंत्रालय द्वारा पासपोर्ट को केवल यात्रा दस्तावेज बताए जाने के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार के निबंधन विभाग ने आधार कार्ड को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड पहचान का प्रमाण है, लेकिन इसे किसी व्यक्ति के पारिवारिक संबंधों का अंतिम या वैधानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता।
निबंधन विभाग के अनुसार, आधार कार्ड पर दर्ज पिता, पति, पत्नी या अन्य अभिभावक का नाम केवल पहचान संबंधी जानकारी के लिए होता है। इसे किसी व्यक्ति और उसके परिजन के बीच कानूनी संबंध का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाएगा।
विभाग ने कहा कि संपत्ति पंजीकरण, उत्तराधिकार, पारिवारिक दावों या अन्य कानूनी मामलों में संबंधों की पुष्टि के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध दस्तावेजों और प्रमाणों को ही आधार माना जाएगा। केवल आधार कार्ड पर दर्ज जानकारी के आधार पर किसी रिश्ते को कानूनी रूप से प्रमाणित नहीं किया जा सकता।
इससे पहले विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया था कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है और इसे भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। नागरिकता से जुड़े मामलों में अन्य वैधानिक दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रियाओं को महत्व दिया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधार कार्ड और पासपोर्ट जैसे दस्तावेज पहचान एवं सुविधा के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन हर दस्तावेज का अपना अलग उद्देश्य और कानूनी दायरा होता है। इसलिए नागरिकता, पारिवारिक संबंध, संपत्ति अधिकार या अन्य कानूनी दावों के लिए संबंधित कानूनों के तहत निर्धारित दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ती है।
निबंधन विभाग के इस स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि आधार कार्ड पर दर्ज पिता, पति या अभिभावक का नाम रिश्ते का संकेत तो हो सकता है, लेकिन उसे संबंध का अंतिम और वैधानिक प्रमाण नहीं माना जाएगा।