अमेरिका :-अमेरिका द्वारा ईरान के तेल निर्यात पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में 60 दिनों की अस्थायी राहत देने के फैसले के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा असर देखने को मिला है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद जगी है, जिसके चलते ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरानी तेल की अतिरिक्त आपूर्ति से वैश्विक बाजार में सप्लाई का दबाव कम होगा और तेल की कीमतों को स्थिरता मिल सकती है। तेल की कीमतों में नरमी का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर भी सकारात्मक रूप से दिखाई दिया, जहां निवेशकों ने राहत की सांस ली।
भारत को क्या होगा फायदा?
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयातकों में से एक है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने से देश को कई मोर्चों पर लाभ मिल सकता है।
- तेल आयात बिल में कमी आ सकती है।
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव घट सकता है।
- परिवहन लागत कम होने से महंगाई नियंत्रण में मदद मिल सकती है।
- रुपये पर दबाव कम होने और चालू खाते के घाटे में राहत मिलने की संभावना है।
- शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है।
शेयर बाजार में दिखी तेजी
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार में भी सकारात्मक माहौल देखने को मिला। एयरलाइंस, पेंट, केमिकल और तेल पर निर्भर उद्योगों के शेयरों में खरीदारी बढ़ी, क्योंकि सस्ते कच्चे तेल से इन कंपनियों की लागत घट सकती है।
आगे क्या?
हालांकि यह राहत फिलहाल 60 दिनों के लिए है। बाजार की नजर अब अमेरिका और ईरान के बीच आगे होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों पर रहेगी। यदि प्रतिबंधों में और ढील दी जाती है तो वैश्विक तेल बाजार में कीमतों पर और दबाव आ सकता है। वहीं किसी नए भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में बाजार का रुख फिर बदल सकता है।
मुख्य बातें:
- अमेरिका ने 60 दिनों के लिए ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में राहत दी।
- वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट।
- भारत के तेल आयात बिल और महंगाई पर सकारात्मक असर संभव।
- शेयर बाजार में निवेशकों का उत्साह बढ़ा।
- ऊर्जा बाजार की नजर अब अगले अमेरिकी फैसलों पर टिकी है।