नई दिल्ली। कुछ समय पहले तक राष्ट्रीय राजनीति में लगभग अनजान मानी जाने वाली नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) अब अचानक सुर्खियों के केंद्र में आ गई है। इसकी वजह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों का इस पार्टी में शामिल होना है, जिसने देश की राजनीतिक हलचल को नया मोड़ दे दिया है।
जानकारी के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने NCPI में विलय का फैसला लेते हुए लोकसभा अध्यक्ष को इसकी सूचना दी है। साथ ही इन सांसदों ने संसद में अलग बैठने की मांग भी की है। इस घटनाक्रम को पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़े राजनीतिक पुनर्संयोजन के रूप में देखा जा रहा है।
NCPI मूल रूप से त्रिपुरा से जुड़ी एक छोटी राजनीतिक पार्टी मानी जाती रही है। हालांकि पार्टी का संगठनात्मक और कानूनी आधार पश्चिम बंगाल से भी जुड़ा हुआ है। बागी सांसदों के शामिल होने के बाद यह पार्टी अचानक संसद में महत्वपूर्ण ताकत के रूप में उभर गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बागी सांसदों का यह समूह एनडीए को समर्थन देने के पक्ष में है। इस कदम के बाद NCPI को राष्ट्रीय राजनीति में नई पहचान मिलने लगी है और इसे सत्तारूढ़ गठबंधन का एक महत्वपूर्ण सहयोगी माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल पार्टी बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में इस विलय और उसके कानूनी-राजनीतिक प्रभावों पर सभी की नजर रहेगी।