Hari Shankar Tibrewal (नई दिल्ली):- महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में फंसे दुबई बेस्ड कारोबारी हरि शंकर तिबरेवाल को दिल्ली कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की द्वारका कोर्ट ने तिबरेवाल द्वारा दायर मानहानि के मामले में पहले दिए गए अंतरिम आदेश (Interim Injunction) को बरकरार रखते हुए Confirm कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि बिना तथ्यों और सबूतों के किसी की छवि को धूमिल नहीं किया जा सकता।
Hari Shankar Tibrewal: क्या है पूरा मामला?
पिछले दो सालों से प्रवर्तन निदेशालय (ED) महादेव ऑनलाइन बुक बेटिंग नेटवर्क की जांच कर रहा है। इस नेटवर्क पर आरोप है कि इसने भारत में हजारों करोड़ रुपये के अवैध सट्टेबाजी रैकेट को अंजाम दिया है। इस जांच के दौरान कई बड़े नाम सामने आए, जिसमें हरि शंकर तिबरेवाल का नाम भी शामिल है।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि तिबरेवाल इस पूरे नेटवर्क के लिए मनी लॉन्ड्रिंग और दुबई में फर्जी कंपनियों के जरिए पैसों को ठिकाने लगाने का काम करते थे। कई बड़े न्यूज पोर्टल और अखबारों ने तिबरेवाल को इस घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता तक बता दिया था।
इन रिपोर्ट्स के बाद हरि शंकर तिबरेवाल ने दिल्ली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने 9 बड़े मीडिया संस्थानों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। याचिका में कहा गया कि ED की जांच अभी शुरुआती चरण में है और किसी भी कोर्ट ने उन्हें दोषी करार नहीं दिया है, इसके बावजूद मीडिया ट्रायल कर उनकी सामाजिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
Hari Shankar Tibrewal: कोर्ट की पिछली कार्रवाई क्या थी?
इससे पहले सुनवाई करते हुए दिल्ली कोर्ट ने तिबरेवाल के पक्ष में अंतरिम आदेश जारी किया था। कोर्ट ने संबंधित मीडिया हाउस को उन लेखों, वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट को 48 घंटों के अंदर हटाने का निर्देश दिया था, जिनमें तिबरेवाल के खिलाफ अपुष्ट और मानहानिकारक आरोप लगाए गए थे। कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगली सुनवाई तक इस तरह की कोई भी नई रिपोर्ट पब्लिश न की जाए।
मीडिया संस्थानों की तरफ से इस आदेश को चुनौती दी गई थी और प्रेस की स्वतंत्रता का हवाला दिया गया था।
Hari Shankar Tibrewal: अब कोर्ट ने क्या कहा?
21 सितंबर को हुई ताजा सुनवाई में द्वारका कोर्ट के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज ने मीडिया संस्थानों की आपत्तियों को खारिज कर दिया और अपने पहले के आदेश को Confirm कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा –
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी लोकतंत्र का मूल स्तंभ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति की गरिमा और प्रतिष्ठा को बिना किसी ठोस सबूत के रौंद दिया जाए। जब जांच एजेंसी की तरफ से कोई चार्जशीट या कोर्ट की तरफ से दोषसिद्धि नहीं हुई है, तब किसी को ‘घोटालेबाज’ या ‘मास्टरमाइंड’ कहना सीधे तौर पर मानहानि की श्रेणी में आता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह Injunction स्थायी नहीं है, लेकिन जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक यथास्थिति बनी रहेगी। सभी 9 मीडिया संस्थानों को अपने प्लेटफॉर्म से विवादित कंटेंट हटाना होगा और भविष्य में बिना वेरिफिकेशन के ऐसी खबरें नहीं चलानी होंगी।
Hari Shankar Tibrewal: कौन हैं हरि शंकर तिबरेवाल?
हरि शंकर तिबरेवाल मूल रूप से कोलकाता के रहने वाले हैं, लेकिन पिछले कई सालों से दुबई में रहकर अपना कारोबार चला रहे हैं। उनका स्टील, रियल एस्टेट और इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट का बिजनेस है। ED का आरोप है कि महादेव ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने तिबरेवाल की कंपनियों के जरिए ही पैसों की हेराफेरी की। हालांकि तिबरेवाल ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है।
Hari Shankar Tibrewal: इस फैसले के क्या मायने हैं?
यह फैसला डिजिटल मीडिया के लिए एक नजीर माना जा रहा है। अक्सर देखा जाता है कि ED या CBI की जांच के दौरान ही मीडिया ट्रायल शुरू हो जाता है और आरोपी को कोर्ट के फैसले से पहले ही दोषी ठहरा दिया जाता है। दिल्ली कोर्ट के इस फैसले ने यह संदेश दिया है कि खबरें तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, अटकलों पर नहीं।
फिलहाल इस मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में होगी, तब कोर्ट इस बात पर फैसला करेगा कि क्या यह Injunction स्थायी किया जाए या नहीं।