Supreme Court TMC Accounts (नई दिल्ली):- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 1 अक्टूबर को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने पार्टी के 4 डेबिट-फ्रीज बैंक अकाउंट को ऑपरेट करने की इजाजत मांगने वाली याचिका खारिज कर दी।
Supreme Court TMC Accounts: कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच ने कहा –
> “The Election Commission has frozen the symbol and therefore the larger issue as to who is entitled to the amount is pending adjudication. We refrain from going into the merits. We are not inclined to exercise our jurisdiction under Article 136.”
मतलब – जब चुनाव आयोग ने ही TMC का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया है, तो इन खातों में पड़े पैसे का असली हकदार कौन है, ये तय होना बाकी है। जब तक हक तय नहीं, अकाउंट फ्रीज ही रहेंगे।
कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट को सुनवाई तेज करने को कहा है।
Supreme Court TMC Accounts: कितना पैसा फंसा है?
– 4 अकाउंट – Indian Bank सहित PSU बैंकों में
– राशि – करीब 804 करोड़ रुपये (कुछ रिपोर्ट में 440 करोड़ बताया)
– फ्रीज किसने किया – West Bengal Police ने, MLA बिश्वनाथ दास की साइबर क्राइम शिकायत पर FIR के बाद
ये मामला पहले वाले 3 HDFC अकाउंट फ्रीज मामले से अलग है।

Supreme Court TMC Accounts: दो गुट की लड़ाई
TMC में दो फाड़ हो गई है। असली TMC कौन है, इसका विवाद चुनाव आयोग में लंबित है।
– ममता गुट की दलील (Abhishek Manu Singhvi) – “अगर पुलिस सारे अकाउंट फ्रीज कर दे, तो राजनीतिक गतिविधि रोकने का ये सबसे अच्छा तरीका है। पार्टी का महीने का न्यूनतम खर्च 12.15 करोड़ है, रोजमर्रा का काम ठप हो गया है।”
– सरकार की दलील (Solicitor General Tushar Mehta) – “अब TMC के दो गुट हैं, असली कौन है ECI तय करेगा। मामला हाईकोर्ट में है, सुनवाई की तारीख आगे की है, उसे जल्दी करा दिया जाए।
Supreme Court TMC Accounts: हाईकोर्ट में क्या हुआ था?
27 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने अंतरिम राहत देने से इनकार किया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि 4 अकाउंट को ऑपरेट करने की इजाजत देने से उसका पिछला आदेश (जिसमें पार्टी को रोजमर्रा के खर्च के लिए इजाजत दी थी) कमजोर हो जाएगा।
TMC ने कहा था कि FIR में खामियां हैं। हाईकोर्ट ने दुर्गा पूजा वेकेशन के बाद सुनवाई रखने को कहा था। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट में जल्दी सुनवाई होगी।