पर्यावरण संरक्षण (नई दिल्ली): अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) के निदेशक प्रो. पीके प्रजापति ने स्वच्छता और साफ-सफाई को केवल अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी की साझा जिम्मेदारी है।
प्रो. प्रजापति ने 2 अक्टूबर को AIIA में आयोजित ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान 2026 के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस दौरान संस्थान में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया और कर्मचारियों, शिक्षकों तथा शोधार्थियों को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वच्छता के साथ-साथ जिम्मेदार कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
पर्यावरण संरक्षण: AIIA में आयोजित यह अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चला। अभियान की थीम ‘स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ रखी गई थी। इसके तहत संस्थान परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सफाई अभियान चलाए गए। अभियान में फैकल्टी सदस्यों के साथ पीएचडी और पोस्टग्रेजुएट स्कॉलर्स, कर्मचारी, मरीज और उनके तीमारदारों ने भी भाग लिया।
अभियान के दौरान अस्पताल के प्रतीक्षालयों में मरीजों और उनके तीमारदारों को कचरे के चार-तरफा पृथक्करण, घर पर कंपोस्टिंग, Reduce-Reuse-Recycle यानी 3R और सिंगल यूज प्लास्टिक से बचने के बारे में जागरूक किया गया। इसके अलावा श्रमदान के माध्यम से कार्यालयों और संस्थान के अंदरूनी हिस्सों की सफाई की गई।
पर्यावरण संरक्षण: समापन कार्यक्रम में स्वच्छता बनाए रखने में योगदान देने वाले सफाई मित्रों को भी सम्मानित किया गया। AIIA की ओर से बताया गया कि अभियान का उद्देश्य लोगों में यह भावना विकसित करना है कि साफ-सफाई केवल किसी विशेष दिन या अभियान के दौरान की जाने वाली गतिविधि नहीं, बल्कि रोजमर्रा के व्यवहार का हिस्सा होनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत NTPC क्षेत्र में पौधरोपण अभियान भी आयोजित किया गया। इसमें संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों, फैकल्टी सदस्यों और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया।
AIIA ने यह भी बताया कि स्वच्छता और प्रभावी कचरा प्रबंधन से जुड़े प्रयास आगे भी जारी रहेंगे। संस्थान में स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत 31 अक्टूबर तक गतिविधियां चलेंगी। इसका फोकस ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान पर है।