आतंकवाद वित्तपोषण: UN में भारत ने फिर उठाई CCIT को जल्द अपनाने की मांग, पहलगाम हमले का जिक्र कर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कानूनी ढांचे पर जोर

आतंकवाद वित्तपोषण: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म (CCIT) को जल्द अपनाने की मांग दोहराई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में भारत की ओर से बोलते हुए बीजेपी सांसद बिप्लब कुमार देब ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के मामलों में हमले को अंजाम देने वालों के साथ-साथ उसके आयोजकों, वित्तपोषकों और समर्थकों को भी जवाबदेह ठहराने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था जरूरी है।

बिप्लब कुमार देब ने अपने संबोधन में पिछले साल हुए पहलगाम आतंकी हमले का भी उल्लेख किया। इस हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी और एकसमान कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आतंकवाद के अलग-अलग रूपों के बीच भेद नहीं किया जाना चाहिए।

आतंकवाद वित्तपोषण: 1996 में भारत ने रखा था CCIT का प्रस्ताव

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 1996 में CCIT का प्रस्ताव रखा था। इसका उद्देश्य आतंकवाद से निपटने के लिए एक व्यापक और सार्वभौमिक अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा तैयार करना है। हालांकि, इस कन्वेंशन को अभी तक अंतिम रूप से अपनाया नहीं जा सका है। भारत लंबे समय से इसके शीघ्र निष्कर्ष और अंगीकरण की मांग करता रहा है।

भारत का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में किसी भी प्रकार के दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए। देब ने कहा कि आतंकवाद को ‘अच्छे’ और ‘बुरे’ जैसे अलग-अलग वर्गों में बांटना उचित नहीं है और नागरिकों को निशाना बनाने के किसी भी कृत्य को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

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आतंकवाद वित्तपोषण: आतंकवाद में नई तकनीक के इस्तेमाल पर भी चिंता

अपने संबोधन में बिप्लब कुमार देब ने आतंकवादी संगठनों द्वारा नई तकनीकों के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने भर्ती, कट्टरपंथीकरण, प्रचार, वित्तीय गतिविधियों और अन्य गतिविधियों में उभरती तकनीकों के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया।

उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्राथमिकताओं का भी उल्लेख किया। इनमें आतंकवादी वित्तपोषण को रोकना, पीड़ितों को केंद्र में रखना, राष्ट्रीय क्षमता को मजबूत करना, आतंकवादी विचारधारा का मुकाबला करना और आतंकवादी ढांचे को कमजोर करना शामिल है।

आतंकवाद वित्तपोषण: अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भारत का जोर

भारत लगातार यह रुख रखता रहा है कि आतंकवाद जैसी सीमा-पार चुनौती से निपटने के लिए देशों के बीच मजबूत सहयोग और प्रभावी कानूनी तंत्र जरूरी है। हाल में BRICS के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में भी CCIT को शीघ्र अंतिम रूप देने और अपनाने की दिशा में तेजी लाने की बात कही गई थी।

भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में CCIT को जल्द अपनाने की मांग ऐसे समय दोहराई गई है, जब आतंकवाद के वित्तपोषण, सीमा-पार गतिविधियों और नई तकनीकों के दुरुपयोग को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा जारी है। भारत ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद से जुड़े सभी पक्षों के खिलाफ प्रभावी अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्रवाई के लिए व्यापक सहमति और मजबूत व्यवस्था की जरूरत है।

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