कैसी पहेली जिंदगानी: रेखा के डांस में अदाएं भी और भावनाएं भी
(मुंबई): हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री रेखा अपनी खूबसूरती, शानदार अभिनय और दिलकश अंदाज के लिए जानी जाती हैं। उनकी फिल्मों के कई गाने ऐसे हैं, जिन्होंने दशकों बाद भी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखी है। रेखा की खासियत सिर्फ उनके डांस स्टेप्स में नहीं, बल्कि चेहरे के भाव, आंखों की भाषा, हाथों की मुद्राओं और हर अंदाज में दिखाई देने वाली नजाकत में भी रही है।
उनके डांस में शास्त्रीय नृत्य की गरिमा और बॉलीवुड की रंगीन शैली का अनूठा मेल देखने को मिलता है। यही वजह है कि उनके कई गाने आज भी हिंदी सिनेमा की यादगार प्रस्तुतियों में गिने जाते हैं। ‘इन आंखों की मस्ती’ से लेकर ‘सलाम-ए-इश्क’ और ‘कैसी पहेली जिंदगानी’ तक, रेखा ने हर गीत में एक अलग रंग पेश किया।
1. इन आंखों की मस्ती: अदाओं और कथक का खूबसूरत संगम
साल 1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘उमराव जान’ का गीत ‘इन आंखों की मस्ती’ रेखा की सबसे यादगार प्रस्तुतियों में शामिल है। मुजफ्फर अली के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रेखा ने उमराव जान का किरदार निभाया था।
इस गीत में उनकी आंखों के भाव, चेहरे की नजाकत और कथक आधारित मुद्राएं दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। बिना किसी जल्दबाजी के किया गया उनका नृत्य गीत के भावों को गहराई देता है। आशा भोसले की आवाज और खय्याम के संगीत ने इस प्रस्तुति को और भी खास बना दिया। इस फिल्म के लिए रेखा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था।
2. दिल चीज क्या है: शास्त्रीय नृत्य की शानदार मिसाल
‘उमराव जान’ का ही एक अन्य लोकप्रिय गीत ‘दिल चीज क्या है’ रेखा की नृत्य कला का शानदार उदाहरण है। इस गीत में उनकी मुद्राएं, हाथों के इशारे और पैरों की थाप कहानी के भावों को सामने लाते हैं।
रेखा ने अपने चेहरे के हाव-भाव और सधी हुई अदाओं से इस प्रस्तुति को यादगार बनाया। गीत में शास्त्रीय नृत्य की बारीकियां और किरदार की भावनाएं एक साथ दिखाई देती हैं। यही कारण है कि यह गीत आज भी संगीत और नृत्य प्रेमियों के बीच खास पहचान रखता है।
3. सलाम-ए-इश्क मेरी जान: नजाकत और भावनाओं का मेल
साल 1978 में आई फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ का गीत ‘सलाम-ए-इश्क मेरी जान’ हिंदी सिनेमा के सदाबहार गीतों में गिना जाता है। इस फिल्म में रेखा ने जोहरा बाई का किरदार निभाया था।
गीत में उनकी अदाएं, नृत्य की मुद्राएं और भावपूर्ण अभिव्यक्ति किरदार की संवेदनशीलता को सामने लाती हैं। रेखा ने इस प्रस्तुति में केवल नृत्य नहीं किया, बल्कि अपने हाव-भाव से गीत की भावनाओं को भी जीवंत बनाया। अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म में उनकी मौजूदगी ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा।
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4. परदेसिया: रंगीन अंदाज और शानदार स्क्रीन प्रेजेंस
फिल्म ‘मिस्टर नटवरलाल’ का गीत ‘परदेसिया’ रेखा की लोकप्रिय प्रस्तुतियों में शामिल है। इस गीत में उनका रंगीन पहनावा, चंचल अंदाज और अमिताभ बच्चन के साथ उनकी स्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों को खूब पसंद आई।
लता मंगेशकर और किशोर कुमार की आवाजों से सजा यह गीत आज भी पुरानी हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय संगीत में अपनी जगह बनाए हुए है। रेखा ने इसमें पारंपरिक नृत्य की गंभीरता से अलग एक चुलबुला और जीवंत अंदाज पेश किया।
5. कैसी पहेली जिंदगानी: रेट्रो अंदाज में रेखा का जलवा
साल 2005 में रिलीज हुई फिल्म ‘परिणीता’ का गीत ‘कैसी पहेली जिंदगानी’ रेखा की अलग तरह की प्रस्तुति के लिए याद किया जाता है। इस गीत में उन्होंने पुराने दौर के जैज और कैबरे क्लबों से प्रेरित अंदाज अपनाया था।
उनका रेट्रो लुक, आत्मविश्वास से भरी अदाएं और संगीत की लय के अनुरूप किया गया नृत्य इस गीत को बाकी प्रस्तुतियों से अलग बनाता है। यह गीत दिखाता है कि रेखा अपनी पारंपरिक छवि से बाहर निकलकर भी पर्दे पर प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा सकती हैं।
कैसी पहेली जिंदगानी: क्यों आज भी याद किए जाते हैं रेखा के डांस?
रेखा की प्रस्तुतियों की सबसे बड़ी खासियत उनकी अभिव्यक्ति है। वह नृत्य के माध्यम से किरदार की भावनाओं को सामने लाती हैं। कहीं उनकी आंखें कहानी कहती हैं, तो कहीं हाथों की मुद्राएं और शरीर की सधी हुई गति गीत को खास बना देती है।
उनके यादगार गाने इस बात का उदाहरण हैं कि बेहतरीन प्रस्तुति केवल तेज स्टेप्स या भव्य सेट पर निर्भर नहीं करती। भाव, संगीत की समझ और मंचीय उपस्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। यही वजह है कि रेखा के डांस नंबर आज भी हिंदी सिनेमा की अमूल्य विरासत का हिस्सा हैं।