पीएम मोदी बोले- वैश्विक स्थिरता और आर्थिक प्रगति में अहम है भारत-ब्रिटेन साझेदारी
भारत ब्रिटेन व्यापार समझौता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत और ब्रिटेन के बीच बढ़ती साझेदारी वैश्विक स्थिरता और आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बन रही है। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, शिक्षा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया।
9 अक्टूबर 2025 को मुंबई में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ हुई बैठक के बाद दोनों देशों ने अपने व्यापक रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
व्यापार और निवेश में सहयोग बढ़ाने पर जोर
भारत ब्रिटेन व्यापार समझौता: भारत और ब्रिटेन के संबंधों में व्यापार और निवेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के जरिए आर्थिक संबंधों को नई गति देने की उम्मीद जताई थी।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने समझौते की पुष्टि और उसके लाभों को जल्द लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही। इससे विभिन्न क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों और निवेश के अवसर बढ़ाने की संभावनाएं हैं।
भारत ब्रिटेन व्यापार समझौता: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान उनके साथ कारोबारियों, उद्यमियों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी आया था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच कारोबारी संपर्क और निवेश के अवसरों को बढ़ावा देना था।
तकनीक और नवाचार में साझेदारी
भारत ब्रिटेन व्यापार समझौता: भारत और ब्रिटेन ने उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), दूरसंचार, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े क्षेत्र शामिल हैं।
दोनों देशों ने तकनीकी नवाचार को आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और भविष्य की जरूरतों से जोड़कर देखा। संयुक्त पहल और अनुसंधान के जरिए नई तकनीकों के विकास तथा उनके व्यावहारिक इस्तेमाल को बढ़ावा देने की संभावनाएं भी सामने आईं।
रक्षा और शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर
भारत ब्रिटेन व्यापार समझौता: भारत-ब्रिटेन संबंधों में रक्षा सहयोग भी प्रमुख विषय रहा। दोनों देशों ने रक्षा उद्योग और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
शिक्षा के क्षेत्र में भी साझेदारी को महत्वपूर्ण माना गया। विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग से विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
इसके अलावा स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु तकनीक और बुनियादी ढांचे में निवेश को बढ़ावा देने पर भी दोनों देशों ने अपनी प्रतिबद्धता जताई।
वैश्विक मुद्दों पर भी हुई चर्चा
भारत ब्रिटेन व्यापार समझौता: बैठक में वैश्विक शांति, स्थिरता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के महत्व पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार सहित बहुपक्षीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के विषय पर भी चर्चा की।
यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे क्षेत्रीय मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा रहे। भारत ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांति बहाली के प्रयासों का समर्थन करने की अपनी नीति दोहराई।
भारत-ब्रिटेन संबंधों के लिए क्या है महत्व?
भारत ब्रिटेन व्यापार समझौता: भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग का दायरा व्यापार से आगे बढ़कर तकनीक, रक्षा, शिक्षा, ऊर्जा और वैश्विक कूटनीति तक फैला हुआ है। दोनों देशों की साझेदारी से निवेश, रोजगार, नवाचार और कारोबारी संपर्क के अवसर विकसित हो सकते हैं।
हालांकि, इन पहलों का वास्तविक आर्थिक प्रभाव समझौतों के क्रियान्वयन, निवेश की गति और दोनों देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग पर निर्भर