Ankita Bhandari Case: अंकिता भंडारी मामले में प्रदर्शन के बाद हरीश रावत समेत 31 कांग्रेस नेताओं पर FIR दर्ज

Ankita Bhandari Case: अंकिता भंडारी मामले को लेकर प्रदर्शन, हरीश रावत समेत कांग्रेस नेताओं पर केस

(देहरादून): उत्तराखंड की राजनीति में अंकिता भंडारी मामले को लेकर विवाद तेज हो गया है। सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति के विरोध में प्रदर्शन करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस के करीब 30 अन्य नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। यह प्रदर्शन 14 अक्टूबर को देहरादून स्थित लोक भवन के मुख्य द्वार के बाहर किया गया था। कांग्रेस नेताओं ने अंकिता भंडारी मामले की जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग उठाई थी।

गणेश गोदियाल और अन्य नेताओं के खिलाफ भी मामला

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत और प्रीतम सिंह सहित अन्य नेताओं के खिलाफ भी मामले दर्ज किए गए हैं। रिपोर्टों में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 132 और 223 का उल्लेख किया गया है।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर सवाल उठाए और अंकिता के परिवार की मांगों का समर्थन किया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मामले से जुड़े कथित वीआईपी पहलू की जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है।

Ankita Bhandari Case: क्या है अंकिता भंडारी मामला?

अंकिता भंडारी उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। 18 सितंबर को उनकी हत्या हुई और चार दिन बाद उनका शव चिल्ला नहर से बरामद किया गया। इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो साथियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

मामले में एक कथित प्रभावशाली व्यक्ति यानी ‘वीआईपी’ की भूमिका को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। अंकिता के परिवार ने इस पहलू की गहन जांच की मांग की है। परिवार और कुछ कार्यकर्ताओं ने दुष्यंत कुमार गौतम का नाम भी आरोपों के संदर्भ में उठाया है। हालांकि, गौतम ने इन आरोपों से इनकार किया है और आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई शुरू की है। इन आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

राहुल गांधी ने भी परिवार की मांग का समर्थन किया

अंकिता के माता-पिता ने दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति को रोकने और मामले की जांच पूरी होने तक इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है। 14 अक्टूबर को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली के इंडिया गेट पर प्रदर्शन कर रहे अंकिता के परिवार से मुलाकात की थी।

राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से आग्रह किया कि जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर रोक लगाने पर विचार किया जाए। परिवार ने भी न्याय की मांग दोहराई है।

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Ankita Bhandari Case: जांच और राजनीतिक विवाद पर नजर

हरीश रावत और अन्य कांग्रेस नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद यह मामला उत्तराखंड में राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर कांग्रेस और अंकिता का परिवार मामले के कथित वीआईपी पहलू की जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं दुष्यंत गौतम ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है।

फिलहाल, प्राथमिकी और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ मामले के तथ्यों और आरोपों के बीच अंतर बनाए रखना महत्वपूर्ण है। आगे की कार्रवाई संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी।

स्रोत: ANI

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