नई दिल्ली :- भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है और FY26 में इसने नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। देश में कुल 24.5 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री दर्ज की गई जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह बढ़ोतरी साफ दिखाती है कि लोग अब पारंपरिक ईंधन की बजाय स्वच्छ और सस्ते विकल्प की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
भारत में EV सेक्टर की इस जबरदस्त ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदान दोपहिया और तिपहिया वाहनों का रहा है। ई-स्कूटर और ई-रिक्शा जैसे वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता ने कुल बिक्री को ऊंचाई पर पहुंचाया है। खासकर शहरी और छोटे शहरों में इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
इस बीच इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में भी उल्लेखनीय उछाल देखा गया है। आंकड़ों के अनुसार कार सेगमेंट में करीब 84 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है जो इस बात का संकेत है कि अब लोग कारों में भी इलेक्ट्रिक विकल्प को अपनाने लगे हैं। हालांकि कुल संख्या में दोपहिया और तिपहिया वाहन अभी भी आगे हैं लेकिन कारों की ग्रोथ दर सबसे तेज मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की नीतियां सब्सिडी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार इस ग्रोथ के प्रमुख कारण हैं। साथ ही पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने भी लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित किया है।
पर्यावरण के लिहाज से भी यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि EV से प्रदूषण कम होता है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। आने वाले समय में EV सेक्टर में और तेजी देखने को मिल सकती है क्योंकि कई कंपनियां नए मॉडल लॉन्च करने की तैयारी में हैं।
कुल मिलाकर FY26 भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के लिए एक ऐतिहासिक साल साबित हुआ है और यह संकेत देता है कि देश तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ रहा है।