पेरिस/नई दिल्ली। फ्रांस में आयोजित G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। करीब 16 महीने बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने मुलाकात होने जा रही है, जिसमें भारत-अमेरिका संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक बैठक में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने, भारतीय पेशेवरों के लिए H-1B वीजा नियमों में संभावित बदलाव, ऊर्जा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। दोनों देश लंबे समय से व्यापारिक समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं और इस बैठक को उसी प्रक्रिया का अहम पड़ाव माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति भी वार्ता के केंद्र में रह सकती है। यह मार्ग भारत सहित दुनिया के कई देशों के लिए तेल आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक समुद्री व्यापार की सुचारू व्यवस्था पर भी दोनों नेताओं के बीच विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।
बैठक ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी और ट्रंप के बीच होने वाली यह बातचीत न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दे सकती है, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और वैश्विक रणनीतिक समीकरणों पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है।
G7 समिट के इतर होने वाली यह मुलाकात भारत और अमेरिका के बीच सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि दोनों देशों के नेता किन ठोस निर्णयों और समझौतों के साथ आगे बढ़ते हैं।