मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख Uddhav Thackeray द्वारा बुलाई गई अहम बैठक में पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से केवल 3 सांसदों के शामिल होने से राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी में संभावित टूट और असंतोष की अटकलें तेज हो गई हैं।
राजनीतिक गलियारों में इसे 2022 में हुई बड़ी बगावत की याद से जोड़कर देखा जा रहा है, जब Eknath Shinde के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायकों ने शिवसेना से अलग राह पकड़ ली थी। अब सांसदों की बैठक में कम उपस्थिति ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut ने पार्टी में किसी भी तरह की टूट की आशंकाओं को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि कुछ सांसद व्यक्तिगत और पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके। राउत ने दावा किया कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और विपक्षी दल जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में कुछ सांसदों की गतिविधियों और दिल्ली में हुई बैठकों ने सियासी अटकलों को हवा दी है। ऐसे में उद्धव ठाकरे के लिए पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
महाराष्ट्र में आगामी राजनीतिक समीकरणों और विपक्षी गठबंधनों के बीच यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें उन सांसदों के अगले कदम पर टिकी हैं, जो बैठक से अनुपस्थित रहे। उनके रुख से आने वाले दिनों में शिवसेना (यूबीटी) की राजनीतिक स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल पार्टी नेतृत्व स्थिति को सामान्य बताने में जुटा है, लेकिन कम उपस्थिति ने राज्य की राजनीति में नए सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।