नई दिल्ली :- देश में मौसम का मिजाज लगातार बदलता नजर आ रहा है। सर्दियों का समय छोटा होता जा रहा है, जबकि गर्मी का दौर लंबा और अधिक तीव्र हो रहा है। वहीं मानसून भी अब पहले जैसा भरोसेमंद नहीं रह गया है। कभी इसकी दस्तक देर से होती है तो कभी बारिश का वितरण सामान्य नहीं रहता। ऐसे में इस साल भी मानसून की धीमी प्रगति ने चिंता बढ़ा दी है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल-नीनो परिस्थितियां भारतीय मानसून के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। अल-नीनो के प्रभाव से मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ती हैं, जिससे वर्षा में कमी और बारिश के असमान वितरण की आशंका बढ़ जाती है।
दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार अपेक्षा से धीमी बनी हुई है। स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत के अनुसार, दिल्ली में मानसून के जुलाई के पहले सप्ताह से पहले पहुंचने की संभावना कम है। यदि अल-नीनो का प्रभाव बढ़ता है तो जुलाई से सितंबर के बीच भी सामान्य से कम वर्षा हो सकती है।
इस बीच राजधानी दिल्ली में जून महीने के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 22 जून तक दिल्ली में लगभग 25 प्रतिशत वर्षा की कमी रही है, जिससे गर्मी और उमस से लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो जैसे वैश्विक मौसमीय कारकों के कारण मौसम अधिक अनिश्चित होता जा रहा है। इसका असर कृषि, जल संसाधनों और आम जनजीवन पर पड़ सकता है।
मुख्य बातें:
अल-नीनो के कारण कमजोर पड़ सकता है मानसून।
दिल्ली समेत कई क्षेत्रों में बारिश की कमी दर्ज।
जुलाई-सितंबर के दौरान सामान्य से कम वर्षा की आशंका।
जलवायु परिवर्तन से मौसम का पैटर्न लगातार बदल रहा है।