नई दिल्ली। देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच संसदीय समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से महत्वपूर्ण सवालों पर स्पष्टीकरण मांगा है। समिति ने NTA से ‘पेपर लीक’ की स्पष्ट परिभाषा बताने और वर्ष 2018 से अब तक हुई कथित पेपर लीक घटनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने को कहा है।
सूत्रों के अनुसार, समिति की बैठक के दौरान परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और तकनीकी खामियों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। समिति के सदस्यों ने पूछा कि आखिर किन परिस्थितियों को आधिकारिक तौर पर ‘पेपर लीक’ माना जाता है और ऐसे मामलों में एजेंसी द्वारा क्या कार्रवाई की जाती है।
हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सामने आए विवादों के मद्देनजर समिति ने NTA से वर्ष 2018 से अब तक पेपर लीक या उससे संबंधित घटनाओं का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी गई है।
वहीं, समिति ने CBSE से ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाब तलब किया है। कुछ शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कुछ खामियां सामने आई हैं। समिति ने इन आरोपों पर विस्तृत रिपोर्ट और स्पष्टीकरण मांगा है।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, क्योंकि करोड़ों छात्रों और अभ्यर्थियों का भविष्य इन परीक्षाओं से जुड़ा होता है। सदस्यों ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी युवाओं के विश्वास को प्रभावित कर सकती है।
शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि संसदीय समिति की यह पहल परीक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इससे परीक्षा संचालन संस्थाओं की जवाबदेही भी बढ़ेगी।फिलहाल NTA और CBSE से मांगी गई रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि समिति को मिलने वाले जवाबों के आधार पर भविष्य में परीक्षा सुधारों और सुरक्षा उपायों को लेकर नई सिफारिशें की जा सकती हैं।