Sahil Wakode case (मुंबई):- IIT बॉम्बे के बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद कैंपस में चल रहे विरोध और चर्चाओं के बीच छात्र प्रतिनिधियों ने अपना रुख स्पष्ट किया है। छात्र प्रतिनिधियों ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वे किसी भी तरह की चीटिंग या अकादमिक नियमों के उल्लंघन का समर्थन नहीं करते हैं। छात्रों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध प्रदर्शन नकल या किसी अनुचित शैक्षणिक गतिविधि को सही ठहराने के लिए नहीं था।
Sahil Wakode case: प्रशासनिक व्यवस्था और प्रक्रियाओं पर उठाए सवाल
छात्र प्रतिनिधियों के अनुसार, साहिल वाकोडे की मौत उनके लिए बेहद दुखद घटना है। इस घटना ने संस्थान की मौजूदा व्यवस्था, प्रक्रियाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत सामने रखी है।
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छात्रों ने कहा कि उनके प्रदर्शन का उद्देश्य किसी गलत कार्य का बचाव करना नहीं था। इसके बजाय, वे लंबे समय से महसूस की जा रही प्रशासनिक कमियों और छात्रों की समस्याओं को सामने लाना चाहते थे। छात्र प्रतिनिधियों ने ऐसी व्यवस्था की मांग की है, जिससे भविष्य में किसी अन्य छात्र को ऐसी दर्दनाक स्थिति का सामना न करना पड़े।
Sahil Wakode case: प्रशासन के साथ हुई खुली बैठक
छात्र प्रतिनिधियों ने IIT बॉम्बे के निदेशक और प्रशासन के अन्य सदस्यों के साथ हुई खुली चर्चा को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, इस बैठक में छात्रों को अपनी चिंताओं, सवालों और समस्याओं को सीधे संस्थान के अधिकारियों के सामने रखने का अवसर मिला।
छात्रों का कहना है कि कैंपस से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन और छात्र समुदाय के बीच संवाद जरूरी है। उनका मानना है कि समस्याओं की पहचान और उनके समाधान के लिए पारदर्शी बातचीत को आगे भी जारी रखा जाना चाहिए।
Sahil Wakode case: प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला पर छात्रों का रुख
प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को लेकर भी छात्र प्रतिनिधियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। छात्रों ने कहा कि उन्होंने जांच पूरी होने से पहले प्रोफेसर डूला को दोषी नहीं माना है। उनका कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष और बिना किसी पूर्वाग्रह के होनी चाहिए।
छात्रों के मुताबिक, उनकी मांग यह थी कि जांच पूरी होने तक प्रोफेसर डूला को डीन ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स की जिम्मेदारियों से एहतियातन अलग रखा जाए, ताकि जांच प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ सके। छात्रों ने कहा कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होनी चाहिए।
Sahil Wakode case: बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर रखने की अपील
छात्र प्रतिनिधियों ने साहिल वाकोडे की मौत से जुड़े मुद्दे को बाहरी राजनीतिक दलों, संगठनों या निजी हितों का मंच नहीं बनाने की अपील भी की है। छात्रों का कहना है कि कैंपस की समस्याएं और उनके समाधान की मांग छात्र समुदाय के अपने अनुभवों से जुड़ी हैं।
उनके अनुसार, इस मुद्दे पर छात्रों की आवाज और संस्थान के भीतर होने वाली प्रक्रिया को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। छात्रों ने इस बात पर जोर दिया कि सुधार की प्रक्रिया कैंपस की वास्तविक समस्याओं और छात्रों की चिंताओं के आधार पर आगे बढ़नी चाहिए।
Sahil Wakode case: जांच के बीच सामने आ रहे अलग-अलग पक्ष
साहिल वाकोडे की मौत के बाद मामले में अलग-अलग दावे और आरोप सामने आए हैं। एक ओर छात्र प्रतिनिधि निष्पक्ष जांच और संस्थागत सुधार की मांग कर रहे हैं, वहीं IIT बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर डूला का समर्थन करते हुए कहा है कि उन्होंने परीक्षा के दौरान संस्थान की निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम किया था।
IIT बॉम्बे ने भी पहले जारी किए गए संचार को लेकर माफी मांगी है और कहा है कि साहिल की मौत से पहले की परिस्थितियों से जुड़े तथ्य जांच के अधीन हैं। इस बीच प्रोफेसर डूला को डीन ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स के पद से हटाए जाने की जानकारी सामने आई है।
फिलहाल छात्र प्रतिनिधियों का मुख्य संदेश यही है कि वे नकल या अकादमिक अनुशासन के उल्लंघन का समर्थन नहीं करते, लेकिन साहिल वाकोडे की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच और कैंपस व्यवस्था में आवश्यक सुधार चाहते हैं। मामले में जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्य ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट करेंगे।