Rahul Bose: भारतीय रग्बी में नई शुरुआत की तैयारी, राहुल बोस ने सालभर ट्रेनिंग का दिया संकेत

Rahul Bose (नई दिल्ली):- भारतीय रग्बी को नई पहचान दिलाने की कोशिशों के बीच Rugby India के अध्यक्ष राहुल बोस ने खेल के भविष्य को लेकर अपनी सोच सामने रखी है। बोस का कहना है कि भारतीय रग्बी के विकास के लिए केवल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना पर्याप्त नहीं है। खिलाड़ियों को लगातार प्रशिक्षण, बेहतर प्रतिस्पर्धा और पेशेवर अवसर उपलब्ध कराने के लिए मजबूत सिस्टम तैयार करना जरूरी है।

राहुल बोस लंबे समय से भारतीय रग्बी से जुड़े रहे हैं। वह खुद भारत के लिए 17 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं और अब प्रशासनिक स्तर पर खेल के विकास की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके अनुसार, भारतीय रग्बी के सामने सबसे बड़ी जरूरत ऐसी व्यवस्था तैयार करने की है, जिसमें प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को लंबे समय तक खेल से जुड़े रहने और अपने स्तर को बेहतर करने का अवसर मिले।

Rahul Bose: खिलाड़ियों के लिए आर्थिक मजबूती पर जो

बोस ने भारतीय रग्बी में खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है। उनके अनुसार, देश में रग्बी खेलने वाले खिलाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसे पूर्णकालिक करियर बनाने के लिए आर्थिक सुरक्षा जरूरी है।

Rahul Bose: Rugby Premier League को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। लीग में भारतीय खिलाड़ियों के लिए 50 हजार रुपये से लेकर 5.5 लाख रुपये तक के अनुबंध सामने आए थे। बोस ने कहा था कि आने वाले वर्षों में इस तरह की प्रतियोगिताएं रग्बी को खिलाड़ियों के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य करियर बनाने में मदद कर सकती हैं।

Sahil Wakode case: साहिल वाकोडे मामले में IIT बॉम्बे छात्रों ने खोला मोर्चा, जानिए क्या है पूरा विवाद

उन्होंने यह भी बताया कि Rugby India के राष्ट्रीय कैंप में शामिल खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। हालांकि, उनका जोर इस सहायता को ज्यादा से ज्यादा राज्य स्तरीय खिलाड़ियों तक पहुंचाने पर है। उनके अनुसार, देश में 1,600 से अधिक पंजीकृत खिलाड़ी हैं और ज्यादा खिलाड़ियों को नियमित आर्थिक सहयोग मिलना चाहिए।

Rahul Bose: प्रोफेशनल लीग से तैयार होगा नया टैलेंट पूल

राहुल बोस के मुताबिक, अच्छी तरह संचालित लीग से देश में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का बड़ा पूल तैयार किया जा सकता है। घरेलू खिलाड़ियों को उच्च स्तर के विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिलने से उन्हें अंतरराष्ट्रीय रग्बी की गति और प्रतिस्पर्धा को समझने में मदद मिलती है।

उन्होंने भारतीय और शीर्ष रग्बी देशों के खिलाड़ियों के बीच मौजूद अंतर का भी जिक्र किया था। बोस के अनुसार, इस अंतर को कम करने का एक रास्ता बेहतर खिलाड़ियों के साथ लगातार खेलना है। विदेशी और ‘ब्रिज’ खिलाड़ियों की मौजूदगी भारतीय खिलाड़ियों को उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा का अनुभव दे सकती है।

Rahul Bose: लीग के साथ फेडरेशन की भूमिका भी अहम

बोस ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी लीग की सफलता अकेले भारतीय रग्बी के विकास के लिए पर्याप्त नहीं होगी। उनके मुताबिक, फेडरेशन का काम प्रतिभाओं की पहचान, राष्ट्रीय टीमों की तैयारी, प्रतियोगिताओं का आयोजन और खेल के जमीनी ढांचे को मजबूत करना है।

भारत में रग्बी का विस्तार कई राज्यों और जिलों तक हो चुका है। ऐसे में अगली चुनौती इस आधार को मजबूत करने और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को लगातार उच्चस्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की है।

Rahul Bose: ‘हमें कुछ हासिल करना है’

राहुल बोस का संदेश भारतीय रग्बी को केवल भागीदारी से आगे ले जाने पर केंद्रित है। उनका कहना है कि देश को स्पष्ट लक्ष्य तय करने होंगे और खिलाड़ियों को उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने होंगे।

इसके लिए जमीनी स्तर पर प्रतिभा तलाशने से लेकर बेहतर कोचिंग, नियमित अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों, आर्थिक सहायता और पेशेवर लीग तक कई स्तरों पर काम करने की जरूरत है।

Rahul Bose: भारतीय रग्बी के लिए यह प्रक्रिया लंबी हो सकती है, लेकिन बोस का फोकस एक ऐसा सिस्टम बनाने पर है जिसमें खिलाड़ी लगातार विकसित हो सकें। उनके अनुसार, “हमें कुछ हासिल करना है” केवल एक टूर्नामेंट का लक्ष्य नहीं, बल्कि भारतीय रग्बी को लंबे समय में मजबूत बनाने की दिशा में सोच है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *