पटना HC फैसला (नई दिल्ली): पटना हाईकोर्ट के 9 जुलाई 2026 के एक फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्वतः संज्ञान लिया। मामला यौन अपराध के प्रयास से जुड़े एक पुराने केस का है। पटना हाईकोर्ट ने आरोपी की दोषसिद्धि को रद्द करते हुए कहा था कि महिला की सलवार हटाने का प्रयास और उसके साथ की गई शारीरिक छेड़छाड़, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर, भारतीय दंड संहिता की धारा 376/511 के तहत बलात्कार के प्रयास का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में कुछ टिप्पणियां आपत्तिजनक हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी को सुने बिना हाईकोर्ट के फैसले को सीधे रद्द नहीं किया जा सकता।
क्या था पटना हाईकोर्ट का फैसला?
यह मामला 2008 में बिहार के बांका जिले से जुड़े एक केस का है। अभियोजन के अनुसार, एक महिला फोटो स्टूडियो गई थी। आरोप था कि स्टूडियो संचालक ने उसे अंदर रोककर उसके कपड़े हटाने का प्रयास किया और उसके साथ अनुचित शारीरिक व्यवहार किया।
मामले में निचली अदालत ने आरोपी को बलात्कार के प्रयास सहित संबंधित आरोपों में दोषी ठहराया था। बाद में आरोपी ने पटना हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा स्पष्ट कृत्य नहीं मिला, जिससे बलात्कार के प्रयास की कानूनी आवश्यक शर्तें पूरी होती हों। अदालत ने हालांकि माना कि आरोपों से महिला की गरिमा भंग करने से जुड़ा अपराध बनता है और इसी आधार पर बलात्कार के प्रयास की दोषसिद्धि को बरकरार नहीं रखा।
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पटना HC फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश ने हाईकोर्ट की कुछ टिप्पणियों को लेकर आपत्ति जताई। CJI ने बिहार के एडवोकेट जनरल एसडी संजय से कहा कि आरोपी को नोटिस की तामील सुनिश्चित की जाए। अदालत ने संकेत दिया कि मामले में आगे सुनवाई के बाद ही यह तय किया जाएगा कि हाईकोर्ट के फैसले और उसकी टिप्पणियों के संबंध में क्या कार्रवाई की जाए।
पहले भी ऐसे मामले पर SC ने लिया था संज्ञान
यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही यौन अपराधों से जुड़े एक अन्य हाईकोर्ट फैसले पर स्वतः संज्ञान ले चुका है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द किया था और यौन अपराधों की सुनवाई में न्यायिक संवेदनशीलता की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसी कार्यवाही के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान पटना हाईकोर्ट के फैसले की ओर भी दिलाया था।
अब पटना हाईकोर्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट आरोपी और अन्य संबंधित पक्षों को सुनने के बाद आगे का निर्णय लेगा। फिलहाल शीर्ष अदालत की ओर से हाईकोर्ट के फैसले को अंतिम रूप से रद्द किए जाने का आदेश नहीं दिया गया है।