चुनाव आयुक्त (नई दिल्ली): चुनाव आयोग में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर सामने आई कथित आंतरिक असहमति के बीच कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को आरोप लगाया कि मौजूदा परिस्थितियों में ज्ञानेश कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर बने रहने का “प्रशासनिक और नैतिक अधिकार” खो दिया है। यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक आरोप है, जिसे चुनाव आयोग की ओर से स्वीकार नहीं किया गया है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग के भीतर SIR से जुड़े फैसलों को लेकर दो अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के कामकाज को केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व का समर्थन प्राप्त रहा है। इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने हालिया मीडिया रिपोर्टों और सुप्रीम कोर्ट की बुधवार की कार्यवाही का भी हवाला दिया।
चुनाव आयुक्त: SIR को लेकर क्या है विवाद?
विवाद की पृष्ठभूमि में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी प्रक्रिया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों तथा आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में Form 6, मतदाता रिकॉर्ड के प्रबंधन और कुछ राज्यों में नाम जोड़ने-हटाने से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया है।
कांग्रेस ने इन रिपोर्टों को आधार बनाकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की मांग उठा सकता है। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
चुनाव आयुक्त: चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद के दावों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि किसी बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग विचार, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-पड़ताल सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, अंतिम फैसले और आधिकारिक आदेश निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए और सभी तीन आयुक्तों की मंजूरी से जारी हुए।
आयोग ने यह भी कहा कि उसके अधिकारियों और आयुक्तों को चुनावी प्रक्रिया में सुधार के लिए सुझाव देने का अधिकार है। उसके मुताबिक, मसौदा स्तर पर उठाए गए सवालों और सुझावों का उद्देश्य पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का भी जिक्र
कांग्रेस ने बुधवार को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में आए विभाजित फैसले का भी उल्लेख किया। जयराम रमेश ने न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की टिप्पणियों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल उठाए। इस मामले में नियुक्ति प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता पर आगे बड़ी पीठ द्वारा विचार किए जाने की बात सामने आई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक ओर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग की स्वतंत्रता तथा SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि आंतरिक सुझाव और अलग-अलग राय संस्थागत deliberation का सामान्य हिस्सा हैं और अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लिए गए हैं।