Anti Defection Law: दानम नागेंद्र की विधायकी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, BRS ने फैसले का किया स्वागत; उपचुनाव की मांग तेज

Anti Defection Law (नई दिल्ली): तेलंगाना के खैरताबाद विधानसभा क्षेत्र से जुड़े दलबदल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विधायक दानम नागेंद्र की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार किया, जिसमें नागेंद्र को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत विधायक पद से अयोग्य घोषित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद खैरताबाद विधानसभा सीट रिक्त मानी जा रही है और वहां नए चुनाव की प्रक्रिया का रास्ता खुल गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने 24 सितंबर को नागेंद्र की याचिका पर सुनवाई की। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने कानून की सही व्याख्या की है और उसके फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने दलबदल के संदर्भ में ‘आया राम, गया राम’ वाली टिप्पणी भी की। यह टिप्पणी राजनीतिक दल बदलने वाले नेताओं के संदर्भ में इस्तेमाल होने वाले एक पुराने राजनीतिक मुहावरे से जुड़ी थी।

Anti Defection Law: क्या है दानम नागेंद्र का मामला?

दानम नागेंद्र ने 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में खैरताबाद सीट से भारत राष्ट्र समिति (BRS) के टिकट पर जीत हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का रुख किया और 2024 के लोकसभा चुनाव में सिकंदराबाद सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। उस समय वह खैरताबाद से विधायक बने हुए थे। इसी आधार पर उनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत अयोग्यता की याचिकाएं दायर की गई थीं।

तेलंगाना विधानसभा के स्पीकर गद्दम प्रसाद कुमार ने मार्च 2026 में नागेंद्र के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद मामला तेलंगाना हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने स्पीकर के आदेश को पलटते हुए नागेंद्र को 23 अप्रैल 2024 से अयोग्य घोषित कर दिया और खैरताबाद विधानसभा सीट को रिक्त घोषित किया।

BRS ने फैसले का किया स्वागत

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद BRS ने इसे कांग्रेस के लिए झटका बताते हुए नागेंद्र को दोबारा चुनाव मैदान में उतरकर जनता से जनादेश लेने की चुनौती दी। पार्टी की यह प्रतिक्रिया उसके राजनीतिक रुख के रूप में सामने आई है। BRS नेता केटी रामाराव ने भी पार्टी से कांग्रेस में गए अन्य विधायकों के इस्तीफे और नए सिरे से चुनाव लड़ने की मांग की है।

वहीं, नागेंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। उनके वकील ने दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के आधार पर दलीलें रखीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं पाया।

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Anti Defection Law: अब खैरताबाद सीट पर क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद हाईकोर्ट का अयोग्यता संबंधी आदेश प्रभावी बना हुआ है। खैरताबाद विधानसभा सीट रिक्त होने के कारण आगे निर्वाचन आयोग द्वारा लागू चुनावी प्रक्रिया के तहत उपचुनाव कराया जा सकता है।

यह फैसला तेलंगाना में दलबदल कानून और निर्वाचित प्रतिनिधियों की सदस्यता से जुड़े विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम के रूप में सामने आया है।

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