China Iran Relations (वॉशिंगटन): अमेरिका और चीन के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मुलाकात के दौरान ईरान का मुद्दा भी चर्चा में रहा। अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू के मुताबिक, ट्रंप ने शी को स्पष्ट संदेश दिया कि ईरान को चीन की ओर से किसी भी तरह की सहायता अमेरिका को स्वीकार्य नहीं होगी। इसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष मदद, खुफिया जानकारी, कलपुर्जे या सैन्य उपकरण जैसी सहायता शामिल है।
पर्ड्यू ने CNBC को बताया कि अमेरिका ने पिछले कुछ हफ्तों से चीन के सामने इस मुद्दे को उठाया है। उनके अनुसार, ट्रंप ने 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में शी चिनफिंग के साथ बैठक के दौरान भी चीन के संभावित समर्थन को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने यह नहीं कहा है कि चीन की ओर से ईरान को सैन्य सहायता देने का प्रत्यक्ष प्रमाण मौजूद है। पर्ड्यू ने संभावित अप्रत्यक्ष सहायता को लेकर अमेरिकी चिंताओं का जिक्र किया।
China Iran Relations: ईरान के साथ चीन के संबंध पहले से ही अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बने हुए हैं। Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत हैं। अमेरिकी सांसदों ने भी ट्रंप से चीन के साथ बातचीत में ईरान को मिलने वाली कथित आर्थिक और सैन्य सहायता का मुद्दा उठाने की मांग की थी।
अमेरिका की चिंता केवल तेल खरीद तक सीमित नहीं है। अमेरिकी सांसदों ने चीनी कंपनियों पर ईरान को सैटेलाइट इमेजरी, मिसाइल और ड्रोन से जुड़े कलपुर्जे तथा प्रतिबंधित ईरानी तेल की खरीद के जरिए सहायता देने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों और चीन की भूमिका को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं और सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
China Iran Relations: दूसरी ओर, चीन ने ईरान को लेकर अपनी स्थिति को बातचीत और तनाव कम करने पर केंद्रित बताया है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, शी चिनफिंग ने ट्रंप के साथ बातचीत में अमेरिका और ईरान से जल्द से जल्द बातचीत और वार्ता के रास्ते पर लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि चीन तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में रचनात्मक भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
ट्रंप और शी की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आवाजाही प्रभावित होने के कारण वैश्विक तेल कीमतों पर भी दबाव देखा गया है। 25 सितंबर को Brent crude फिर 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था।
China Iran Relations: इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि ईरान का मुद्दा अमेरिका-चीन संबंधों में एक संवेदनशील विषय बन गया है। एक तरफ वॉशिंगटन बीजिंग से तेहरान को किसी भी संभावित सहायता पर रोक लगाने का दबाव बना रहा है, वहीं चीन बातचीत और कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहा है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।