Ayodhya Ram Mandir Theft (अयोध्या): राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने जांच और चार्जशीट को लेकर सवाल उठाते हुए कथित तौर पर बड़े आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) की ओर से कहा गया है कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे बढ़ रही है।
मामले में अहम घटनाक्रम यह है कि विशेष जांच दल (SIT) ने 23 सितंबर 2026 को स्थानीय अदालत में आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। रिपोर्टों के मुताबिक चार्जशीट और उसके साथ लगाए गए दस्तावेज करीब 60 हजार पन्नों के हैं। जांच में मंदिर में चढ़ावे की रकम की गिनती और उसके बाद नकदी के प्रबंधन से जुड़े मामलों की पड़ताल की गई।
जांच से जुड़े विवरणों के अनुसार, SIT ने नकदी निकालने से जुड़े कई CCTV फुटेज, मोबाइल चैट, बैंक जमा और गवाहों के बयानों को जांच का हिस्सा बनाया है। India Today की रिपोर्ट के मुताबिक चार्जशीट में 200 से अधिक CCTV घटनाओं का उल्लेख है, जिनमें आरोपियों द्वारा कथित तौर पर नकदी निकालने या इसमें मदद करने की बात सामने आती है। हालांकि, जांच से जुड़े आरोपों को अदालत में साबित होना अभी बाकी है।
Ayodhya Ram Mandir Theft: हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जांच एजेंसी ने आठ आरोपियों के पास से करीब 79.85 लाख रुपये की नकदी बरामद होने की बात सामने रखी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जांचकर्ताओं को बैंक तक रकम पहुंचाने की प्रक्रिया के दौरान चोरी का प्रमाण नहीं मिला, जबकि गिनती के दौरान कथित अनधिकृत नकदी निकासी के 105 मामलों की पहचान की गई।
इससे पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 22 सितंबर को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जांच में देरी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि CCTV में चढ़ावे की रकम से जुड़ी कथित चोरी की घटनाएं कई बार रिकॉर्ड हुईं और सवाल उठाया था कि जांच पूरी होने के बावजूद चार्जशीट दाखिल करने में देरी क्यों हुई। उन्होंने कथित तौर पर बड़े आरोपियों तक जांच पहुंचने की मांग भी की थी।
Ayodhya Ram Mandir Theft: अब SIT की चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले में जांच का अगला चरण न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ गया है। अदालत चार्जशीट में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों पर आगे की कार्रवाई तय करेगी। इसलिए जांच में सामने आए आरोपों को फिलहाल अंतिम दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जा सकता।
राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और दान की रकम का मामला धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में जांच एजेंसी की रिपोर्ट, अदालत की आगे की कार्रवाई और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों पर नजर रहेगी।