Jhiram Ghati Attack (नई दिल्ली): छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जिराम घाटी माओवादी हमले के मामले में विशेष एनआईए अदालत के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और हमले में प्रभावित परिवारों के सदस्यों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इस दौरान मामले से जुड़े न्यायिक फैसले और पीड़ित परिवारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
जिराम घाटी हमला 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में हुआ था। उस समय कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले को माओवादी हमलावरों ने निशाना बनाया था। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और कांग्रेस के अन्य नेताओं समेत कम से कम 27 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 38 लोग घायल हुए थे।
NIA अदालत ने 10 दोषियों को सुनाई मौत की सजा
मामले की लंबी सुनवाई के बाद बस्तर की विशेष एनआईए अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया। अदालत ने आपराधिक साजिश और हत्या से जुड़े आरोपों में दोषसिद्धि के बाद 16 सितंबर 2026 को 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई। मामले की सुनवाई एक दशक से अधिक समय तक चली और इस दौरान करीब 294 सुनवाइयां हुईं।
रिपोर्टों के अनुसार, मामले में कुल 11 गिरफ्तार आरोपियों में से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। वहीं, आरोपपत्रों में नामजद कई अन्य आरोपी अभी भी फरार बताए गए हैं। कुछ प्रमुख माओवादी नेताओं ने 2026 में आत्मसमर्पण भी किया है, जिसके बाद उनके खिलाफ लंबित मामलों को लेकर अलग कानूनी प्रक्रिया का सवाल सामने आया है।
Jhiram Ghati Attack: पीड़ित परिवारों ने उठाए सवाल
एनआईए अदालत के फैसले के बाद कुछ पीड़ित परिवारों ने फैसले पर संतोष के बजाय मामले की व्यापक जांच से जुड़े सवाल उठाए। महेंद्र कर्मा की बेटी तुलिका कर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल उठाती हैं, जिनके नाम मामले में पहले सामने आए थे लेकिन बाद में वे आरोपी के रूप में अदालत के सामने नहीं आए।
यह पीड़ित परिवार का पक्ष है। दूसरी ओर, दोषी ठहराए गए लोगों के परिवारों ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके परिजन को गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है। दोषियों के वकील ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की बात कही है।
जिराम घाटी केस में अब आगे क्या?
एनआईए अदालत का फैसला आने के बाद मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। मौत की सजा पाए दोषियों के पास ऊपरी अदालत में अपील का कानूनी विकल्प मौजूद है। इसके अलावा, मामले में फरार आरोपियों और आत्मसमर्पण कर चुके लोगों से जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी आगे कार्रवाई हो सकती है।
जिराम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की सबसे गंभीर हिंसक घटनाओं में शामिल रहा है। इस मामले की जांच और बड़ी साजिश से जुड़े सवालों को लेकर वर्षों से राजनीतिक बहस भी होती रही है। 2018 में तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने मामले की कथित व्यापक साजिश की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया था। हालांकि, इस SIT की मौजूदा स्थिति को लेकर सार्वजनिक रिपोर्टों में स्पष्ट जानकारी सीमित है।
राहुल गांधी के साथ हुई मुलाकात इसी पृष्ठभूमि में हुई है। मुलाकात में पीड़ित परिवारों की चिंताओं और अदालत के फैसले के बाद आगे की कानूनी एवं राजनीतिक कार्रवाई से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।