बंगाल स्वास्थ्य विभाग: सेबाश्रय स्वास्थ्य शिविर पर बंगाल सरकार सख्त, बिना अनुमति पहुंचे सरकारी डॉक्टरों पर कार्रवाई की तैयारी

बंगाल स्वास्थ्य विभाग (कोलकाता): पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी से जुड़े ‘सेबाश्रय’ स्वास्थ्य शिविरों को लेकर राज्य का स्वास्थ्य विभाग जांच के दायरे को आगे बढ़ा रहा है। विभाग ने राज्य संचालित अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों से जुड़े उन डॉक्टरों से पूछताछ शुरू की है, जिन्होंने कथित तौर पर उच्च अधिकारियों की अनुमति के बिना इन शिविरों में मरीजों को देखा था।

रिपोर्टों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग ने शुरुआती चरण में करीब 15 सरकारी डॉक्टरों को पूछताछ के लिए बुलाया है। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि संबंधित डॉक्टरों ने सेबाश्रय शिविरों में जाने से पहले किसी सक्षम अधिकारी से अनुमति ली थी या नहीं। यदि अनुमति ली गई थी तो वह किस स्तर से मिली थी, इसकी भी जांच की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से गठित जांच समिति के सामने यह सवाल भी है कि सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर, मेडिकल विद्यार्थी और अन्य कर्मचारी इन स्वास्थ्य शिविरों में किस प्रक्रिया के तहत शामिल हुए। विभाग यह भी जांच रहा है कि कहीं सरकारी स्वास्थ्य ढांचे या संसाधनों का इस्तेमाल नियमों के विपरीत तो नहीं हुआ।

130 से अधिक डॉक्टरों से पूछताछ की तैयारी

रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की जांच का दायरा आगे बढ़ सकता है और करीब 130 डॉक्टरों से पूछताछ की योजना है। जांच समिति यह भी देखेगी कि शिविरों में काम करने वाले डॉक्टरों की भूमिका क्या थी और उन्हें वहां किस अनुमति या आदेश के आधार पर भेजा गया था।

समिति की जांच केवल डॉक्टरों की उपस्थिति तक सीमित नहीं है। शिविरों में इस्तेमाल किए गए चिकित्सा उपकरणों और जांच प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग यह देख रहा है कि अल्ट्रासोनोग्राफी जैसी जांच करने वाले लोग आवश्यक प्रशिक्षण और पात्रता रखते थे या नहीं।

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बंगाल स्वास्थ्य विभाग: सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल की भी जांच

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि क्या सरकारी चिकित्सा ढांचे का किसी निजी या राजनीतिक रूप से संचालित स्वास्थ्य पहल के लिए नियमों के विरुद्ध इस्तेमाल हुआ। जांच समिति के अध्यक्ष और राज्य के पूर्व स्वास्थ्य-शिक्षा निदेशक सুশांत बंद्योपाध्याय ने कहा कि समिति यह देखेगी कि सरकारी बुनियादी ढांचे का दुरुपयोग हुआ था या नहीं।

इस मामले में पहले भी चिकित्सा संबंधी शिकायतें सामने आई थीं। कलकत्ता हाई कोर्ट के 7 सितंबर 2026 के आदेश में भी सेबाश्रय और उससे संबंधित शिकायतों में कथित क्लिनिकल गतिविधियों तथा मेडिकल नेग्लिजेंस के आरोपों का उल्लेख किया गया था। अदालत ने कहा था कि जांच के शुरुआती चरण में आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच से सामने आएगी।

अभिषेक बनर्जी से जुड़ा मामला भी अदालत पहुंचा

सेबाश्रय को लेकर दर्ज कुछ शिकायतों और FIR के संबंध में अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था। सितंबर में अदालत ने जांच जारी रखने की बात कही थी, लेकिन साथ ही बनर्जी के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई से उन्हें अंतरिम राहत दी थी। अदालत ने यह भी कहा था कि कथित चिकित्सा अनियमितताओं की जांच की जा सकती है और आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद स्पष्ट होगी।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है। सरकारी डॉक्टरों की अनुमति, उनकी भूमिका, सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और स्वास्थ्य शिविरों में अपनाई गई प्रक्रियाओं से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की तस्वीर स्पष्ट होगी।

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