Poshan Maah 2026 (गांधीनगर): गुजरात में ‘पोषण माह-2026’ के तहत पोषण और कुपोषण की रोकथाम को लेकर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। 27 सितंबर तक राज्य में पोषण से जुड़ी 2.43 करोड़ से अधिक गतिविधियां दर्ज की गई हैं। अभियान में बच्चों के पोषण, संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य निगरानी और शुरुआती बचपन की देखभाल पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इस वर्ष अभियान की थीम ‘आपणी आंगणवाड़ी, आपणी जवाबदारी’ रखी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ स्वास्थ्य, पंचायत, ग्रामीण विकास और शिक्षा विभाग समेत कई सरकारी इकाइयां इसमें भाग ले रही हैं। आंगनवाड़ी एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, स्वयं सहायता समूहों, अभिभावकों और स्थानीय समुदायों को भी अभियान से जोड़ा गया है।
Poshan Maah 2026: आंकड़ों के अनुसार, दर्ज की गई 2.43 करोड़ से अधिक गतिविधियों में महिला एवं बाल विकास विभाग की करीब 56.13 लाख गतिविधियां शामिल हैं। वहीं लगभग 1.87 करोड़ गतिविधियां अन्य विभागों और संबंधित संस्थाओं की ओर से की गई हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, आयुष, ग्रामीण विकास, पंचायत और शिक्षा विभाग अभियान में प्रमुख योगदान देने वाले विभागों में शामिल हैं।
जिला स्तर पर महीसागर, वलसाड, पाटन, आणंद और मेहसाणा में बड़ी संख्या में गतिविधियां दर्ज की गई हैं। वलसाड में पोषण जागरूकता रैली भी आयोजित की गई। अभियान के जरिए लोगों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
अभियान में प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों, मोटे अनाज यानी श्री अन्न, दालों, हरी सब्जियों, फलों, दूध, मेवों और बीजों के पोषण संबंधी महत्व पर भी जानकारी दी जा रही है। कई स्थानों पर पौष्टिक व्यंजनों के प्रदर्शन, पोषण मेले और संतुलित आहार को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सूरत में कॉलेज के विद्यार्थी भी स्वस्थ खान-पान और जंक फूड के नुकसान को लेकर जागरूकता गतिविधियों में भाग ले रहे हैं।
Poshan Maah 2026: आंगनवाड़ी केंद्रों को बच्चों के पोषण और शुरुआती विकास के लिए अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। केंद्रों पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियों की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
बच्चों के वजन और लंबाई की नियमित निगरानी तथा उनके विवरण को पोषण ट्रैकर पर दर्ज करने की व्यवस्था भी अभियान का हिस्सा है। इससे कुपोषण की शुरुआती पहचान करने और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से उपचार एवं फॉलोअप की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
राज्य में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य पोषण को केवल पोषण माह तक सीमित न रखकर इसे रोजमर्रा की आदत और सामुदायिक जिम्मेदारी के रूप में बढ़ावा देना है।