Portfolio Management Services: PMS उद्योग में 20% से ज्यादा CAGR की संभावना, निवेश भागीदारी बढ़ने से विस्तार की उम्मीद: SEBI चेयरमैन

Portfolio Management Services (नई दिल्ली): भारतीय पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) उद्योग में आने वाले वर्षों में तेज वृद्धि की संभावना जताई गई है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय के अनुसार निवेशकों की भागीदारी बढ़ने और निवेश के प्रति जागरूकता गहरी होने के साथ PMS क्षेत्र 20 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) हासिल करने की क्षमता रखता है।

PMS यानी Portfolio Management Services ऐसी निवेश सेवाएं हैं जिनमें पेशेवर पोर्टफोलियो मैनेजर ग्राहकों की जरूरत और निवेश उद्देश्य के अनुसार पोर्टफोलियो का प्रबंधन करते हैं। यह म्यूचुअल फंड से अलग संरचना वाला विकल्प है और इसमें निवेशक की वित्तीय स्थिति तथा जोखिम क्षमता के अनुरूप रणनीति तैयार की जा सकती है।

Portfolio Management Services: SEBI के आंकड़ों के मुताबिक गैर-EPFO/PF PMS एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वित्त वर्ष 2020-21 में करीब 5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 31 जनवरी 2026 तक लगभग 10.5 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस अवधि में इसका CAGR करीब 17 प्रतिशत रहा। इसी अवधि में PMS ग्राहकों की संख्या भी बढ़कर लगभग 2.15 लाख हो गई।

SEBI के अनुसार जनवरी 2026 तक देश में पंजीकृत पोर्टफोलियो मैनेजरों की संख्या 501 तक पहुंच गई थी। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में 7,000 से अधिक व्यक्तिगत डिस्ट्रिब्यूटर रजिस्ट्रेशन जोड़े गए। ये आंकड़े PMS क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी और वितरण नेटवर्क के विस्तार को दर्शाते हैं।

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Portfolio Management Services: SEBI के आधिकारिक दस्तावेज में भी PMS उद्योग के AUM में लंबे समय से वृद्धि दर्ज की गई है। मार्च 2025 तक PMS एसेट मैनेजर्स का क्लोजिंग AUM करीब 37.8 लाख करोड़ रुपये था, जबकि सितंबर 2025 में यह लगभग 40.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया था।

PMS उद्योग में बढ़ती दिलचस्पी के पीछे भारत में संपन्न निवेशकों की संख्या बढ़ना और निवेशकों की ओर से ज्यादा कस्टमाइज्ड निवेश समाधान की मांग प्रमुख कारकों में शामिल हैं। SEBI चेयरमैन ने भी कहा है कि PMS क्षेत्र की दीर्घकालिक वृद्धि के लिए बेहतर जोखिम प्रबंधन, पारदर्शी संवाद और निवेशक-केंद्रित व्यवस्था महत्वपूर्ण रहेगी।

हालांकि PMS से जुड़े अनुमानित विकास आंकड़े भविष्य की संभावनाओं को दर्शाते हैं और इन्हें निश्चित परिणाम नहीं माना जा सकता। वास्तविक वृद्धि बाजार की स्थिति, निवेशकों की भागीदारी, नियामकीय बदलाव और उद्योग की कार्यप्रणाली समेत कई कारकों पर निर्भर करेगी।

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