मध्य पूर्व तनाव के बीच भारत ने तेज की ओमान-गुजरात गैस पाइपलाइन परियोजना, ऊर्जा सुरक्षा होगी मजबूत

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं के बीच भारत ने ओमान से गुजरात तक प्रस्तावित गहरे समुद्र (डीप-सी) गैस पाइपलाइन परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। करीब 4.8 अरब डॉलर की लागत वाली इस परियोजना को देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

प्रस्तावित पाइपलाइन के माध्यम से ओमान से प्राकृतिक गैस सीधे भारत के पश्चिमी तट, विशेष रूप से गुजरात, तक पहुंचाई जाएगी। इससे भारत को ऊर्जा आयात के लिए अधिक विश्वसनीय और विविध स्रोत उपलब्ध होंगे तथा वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों का प्रभाव कम करने में मदद मिलेगी।

 

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना अरब सागर के नीचे बिछाई जाने वाली अत्याधुनिक समुद्री पाइपलाइन पर आधारित होगी। इसके पूरा होने के बाद भारत को तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) पर निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायता मिल सकती है।

 

केंद्र सरकार और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए प्राकृतिक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। ओमान-भारत पाइपलाइन परियोजना इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह परियोजना तय समयसीमा में पूरी होती है तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही भारत और ओमान के बीच ऊर्जा सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। परियोजना को लेकर तकनीकी, वित्तीय और पर्यावरणीय पहलुओं पर काम जारी है तथा दोनों देशों के बीच आवश्यक समन्वय को आगे बढ़ाया जा रहा है।

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