नई दिल्ली :- भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के विस्तार और जैव ईंधन पर बढ़ते सरकारी फोकस के बीच गन्ने की खेती को लेकर किसानों और निवेशकों की रुचि बढ़ी है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति से गन्ने और अन्य फीडस्टॉक की मांग में दीर्घकालिक वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, यह कहना कि “इस समय सबसे सुरक्षित निवेश केवल गन्ने की खेती है”, पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि गन्ने की खेती की लाभप्रदता मौसम, पानी की उपलब्धता, सरकारी नीतियों, मिलों के भुगतान, न्यूनतम समर्थन मूल्य और स्थानीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है। हालिया रिपोर्टों में अल नीनो के कारण गन्ने की पैदावार प्रभावित होने और एथेनॉल उद्योग के लिए चावल जैसे वैकल्पिक फीडस्टॉक के उपयोग की संभावना भी जताई गई है।
एथेनॉल की मांग आने वाले वर्षों में बढ़ने का अनुमान है और सरकार जैव ईंधन उत्पादन को बढ़ावा दे रही है, लेकिन किसी भी निवेश या खेती को “सबसे सुरक्षित” कहना उचित नहीं होगा। विशेषज्ञ किसानों को स्थानीय जलवायु, सिंचाई, लागत और बाजार की स्थिति का आकलन करके ही फसल का चयन करने की सलाह देते हैं।