नई दिल्ली :- भारतीय शेयर बाजार ने वैश्विक वित्तीय जगत में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर भारत ने एक बार फिर दुनिया के पांचवें सबसे बड़े शेयर बाजार का स्थान हासिल कर लिया है। इस दौरान ताइवान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों का संयुक्त बाजार मूल्य भारत से नीचे आ गया, जिससे भारत ने वैश्विक रैंकिंग में अपनी स्थिति मजबूत कर ली।
विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय बाजार में लगातार विदेशी निवेश, मजबूत कॉरपोरेट प्रदर्शन, घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और देश की तेज़ आर्थिक वृद्धि ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है। बीते कुछ महीनों में भारतीय इक्विटी बाजार में आई तेजी से सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।
दूसरी ओर, ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों पर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की सतर्कता का असर देखने को मिला। इसके चलते दोनों देशों के शेयर बाजारों का कुल बाजार मूल्य अपेक्षाकृत कम हो गया और भारत ने उन्हें पीछे छोड़ दिया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद, बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और खुदरा निवेशकों की बढ़ती संख्या भारतीय शेयर बाजार को लगातार मजबूती दे रही है। यही कारण है कि वैश्विक निवेशकों का भरोसा भी भारतीय बाजार पर लगातार बढ़ रहा है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि शेयर बाजार में रैंकिंग और बाजार पूंजीकरण समय-समय पर बदलते रहते हैं। इसलिए निवेशकों को केवल वैश्विक रैंकिंग के आधार पर निवेश निर्णय लेने के बजाय कंपनियों की गुणवत्ता, जोखिम और अपने वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखकर निवेश करना चाहिए।
भारत का एक बार फिर दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बनना देश की आर्थिक मजबूती और वैश्विक वित्तीय प्रणाली में उसकी बढ़ती भूमिका का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।